जब नेतृत्व कमजोर पड़ता है, तब जनप्रतिनिधि नए रास्ते चुनते हैं - संजय निरुपम
मुंबई, 18 जून (हि.स.)। शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों द्वारा अलग समूह बनाने को लेकर शिवसेना (शिंदे गुट) के उपनेता संजय निरुपम ने गुरुवार को कहा कि यह स्थिति किसी राजनीतिक साजिश का परिणाम नहीं, बल्कि नेतृत्व के प्रति बढ़ते असंतोष की स्वाभाविक परिणति है।
निरुपम ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही से संबंधित व्हिप का एक निश्चित संवैधानिक और कानूनी दायरा होता है। वर्तमान परिस्थितियों में जिस प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है, उसका कोई ठोस कानूनी आधार दिखाई नहीं देता। संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं की सही जानकारी रखने वालों को जनता को भ्रमित करने के बजाय तथ्यों पर आधारित चर्चा करनी चाहिए। किसी भी राजनीतिक दल में जब सांसद, विधायक, पदाधिकारी लगातार पार्टी छोड़ने लगते हैं, तो यह संगठन और नेतृत्व दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। महाराष्ट्र की जनता देख रही है कि 2022 के बाद से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उद्धव ठाकरे गुट का साथ छोड़कर शिवसेना से जुड़ रहे हैं।
निरुपम ने संजय राऊत पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अक्सर आक्रामक और विरोधाभासी बयान देते हैं। कुछ दिन पहले तक जिन सांसदों की प्रशंसा की जा रही थी, आज उन्हीं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का उपयोग किया जा रहा है। यह राजनीतिक हताशा का संकेत है। साल 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान भी कई प्रकार की चेतावनियां और दावे किए गए थे। लेकिन वास्तविकता ने उन दावों को गलत साबित किया। लोकतंत्र में धमकियों और भय का नहीं बल्कि जनसमर्थन और संगठनात्मक क्षमता का महत्व होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

