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मौसम कैसा है,शासन देगा प्रेस नोट,कुशल किसान व विद्यार्थियों को प्रशिक्षण

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मौसम कैसा है,शासन देगा प्रेस नोट,कुशल किसान व विद्यार्थियों को प्रशिक्षण


मुंबई,09 अगस्त ( हि.स.) । राज्य के मुख्यमंत्री सचिवालय ने राज्य में मौसम की जानकारी के सिस्टम को और असरदार बनाने, मौसम की जानकारी बढ़ाने और विद्यार्थियों और किसानों को आधुनिक मौसम तकनीकी ज्ञान की ट्रेनिंग देने के प्रस्ताव पर ध्यान दिया है, और इसे आग की कार्रवाई के लिए एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट चेंज डिपार्टमेंट और हायर एंड टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट को भेज दिया है।

जलवायु परिवर्तन की वजह से बारिश, तापमान, हीट वेव, भारी बारिश और मौसम से जुड़ी दूसरी घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में, नागरिकों, विद्यार्थियों और किसानों तक मौसम की ज़्यादा सटीक, लोकल और समय पर जानकारी पहुंचाना समय की ज़रूरत बन गई है। इस बारे में पर्यावरणविद और शोधकर्ता डॉ. प्रशांत सिनकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक विस्तृत बयान दिया था।

बयान में राज्य में मौसम की जानकारी देने वाली प्रणाली का समय-समय पर एक्सपर्ट्स से मूल्यांकन करने, स्कूलों और कॉलेजों में 'वेदर लिटरेसी' पहल शुरू करने, विद्यार्थियों को मौसम ऐप, सैटेलाइट इमेजरी और डॉप्लर रडार के बारे में जानकारी देने और सिंचाई विभाग के ज़रिए किसानों को मौसम के आधार पर फैसले लेने की ट्रेनिंग देने की मांग की गई है।

साथ ही, राज्य के लिए एक अधिकारिक मराठी मौसम जानकारी ऐप बनाने और इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट, डॉप्लर रडार और दूसरे ऑफिशियल सोर्स से मिली जानकारी को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी दिया गया है। बयान में मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट, आपदा प्रबंधन विभाग सिंचाई, विश्वविद्यालय और तकनीकों संस्थाओं के बीच ज़्यादा असरदार तालमेल बनाकर लोकल लेवल के अनुमानों को ज़्यादा भरोसेमंद बनाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया है।

इस बयान पर ध्यान देते हुए, मुख्यमंत्री सचिवालय ने ज़रूरी कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को एक प्रस्ताव भेजा है, और उम्मीद है कि सरकार के लेवल पर मौसम की जानकारी और मॉडर्न मौसम टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर अच्छी चर्चा शुरू होगी।

इस बारे में पर्यावरणविद डॉ प्रशांत का कहना है कि - बदलाव की बढ़ती चुनौतियों के बीच मौसम की जानकारी आज के समय की ज़रूरत है। अगर मॉडर्न टेक्नोलॉजी के अच्छे इस्तेमाल से लोगों, विद्यार्थियों और किसानों तक मौसम की सही जानकारी पहुंचे, तो आपदा प्रबंधन ज़्यादा बेहतर और पर्यावरणयुक्त हो जाएगा, और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को ज़रूर बढ़ावा मिले

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा