महाराष्ट्र के जलाशयों में बचा सिर्फ 74 प्रतिशत पानी, पानी प्रबंधन योजना पर सरकार सख्त
मुंबई, 06 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र में कम बारिश होने कारण जलाशयों में सिर्फ 74 फीसदी पानी शेष बचा है। मंगलवार को राज्य के 3,032 जलाशयों में कुल 1,068.87 टीएमसी उपयोगी जल भंडार उपलब्ध था। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 90 फीसदी था। महाराष्ट्र सरकार ने उपलब्ध पानी का नियोजन 31 अगस्त 2027 तक करने और पानी के इस्तेमाल में सावधानी बरतने का फैसला किया है।
सरकार ने जल भंडार के उपयोग में सबसे पहली प्राथमिकता पेयजल को दिया है। इसके बाद सिंचाई फिर इंड्रस्ट्री क्षेत्र को पानी दिया जाएगा। प्रमुख जलाशयों के वर्तमान जल भंडार में कम से कम 10 फीसदी पानी आपातकालीन बफर के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। इसका इस्तेमाल सामान्य जरूरतों के लिए नहीं किया जाएगा। साथ ही एसटीपी प्लांट के जरिए सीवर के पानी को शुद्ध करके बगीचों, सफाई और धुलाई के इस्तमाल में लाने का निर्देश निकाय संस्थाओं को दिया गया है। राज्य में 16 अक्टूबर से 10 प्रतिशत पानी की कटौती की जाएगी. नदियों, झरनों, जलाशयों और नहरों से बिना इजाजत पानी निकासी पर रोक लगा दी गई है। जांच के लिए उड़न दस्ते का गठन किया गया है। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। जल संसाधन विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार उद्योगों को अपने कुल पानी उपयोग में से कम से कम 30 प्रतिशत पानी का फिर से उपयोग या पुनर्चक्रण की व्यवस्था करनी होगी। जहां संभव हो, वहां औद्योगिक और अन्य गैर-पेय जरूरतों के लिए पीने योग्य पानी के बजाय पुनर्चक्रण प्रक्रिया से प्राप्त पानी का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
पानी की बर्बादी और रिसाव रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने के साथ नागरिकों में पानी बचाने को लेकर जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं। पेयजल अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने के बाद उपलब्ध पानी का उपयोग कम पानी वाली रबी फसलों और अधिक चारा देने वाली फसलों के लिए प्राथमिकता से किया जाएगा। पानी की उपलब्धता के अनुसार सिंचाई क्षेत्र और पानी छोड़ने का समय तय किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

