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दावोस में पैसे की बर्बादी, विपक्ष का आरोप

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मुंबई, 21 जनवरी (हि.स.)। दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को लेकर कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने सरकार की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि दावोस जाकर बैठक करना और भारतीय कंपनियों के साथ एग्रीमेंट साइन करना जनता के पैसे की खुली बर्बादी है। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड ने भी इस पर नाराजगी जताई है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दावोस में हैं और राज्य में विदेशी निवेश लाने के प्रयास कर रहे हैं। अलग-अलग कंपनियों के साथ एमओयू साइन किए जा रहे हैं। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इनमें से कुछ समझौते भारतीय कंपनियों के साथ किए गए हैं। इसलिए दावोस दौरे के खर्च और मकसद पर सवाल उठ रहे हैं। शुक्ला ने आरोप लगाया है कि भारतीय दावोस में भारतीयों से मिलने जा रहे हैं। राज्य सरकारें स्विट्जरलैंड में भारतीय कंपनियों के साथ एग्रीमेंट साइन कर रही हैं, जो भारत में भी आसानी से किया जा सकता था। कई राज्यों के मुख्यमंत्री दावोस में मिल रहे हैं। अगर विदेशी कंपनियों के साथ समझोते साइन किए गए होते, तो दावोस दौरा सही होता।

सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक के पहले ही दिन 14.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 15 लाख रोजगार सृजन के समझौतों का दावा किया है। लेकिन जिन कंपनियों के साथ ये करार हुए हैं, उनमें से कई कंपनियां मुंबई की ही हैं। जब इन कंपनियों के कार्यालय मुंबई में मौजूद हैं और कुछ मंत्रालय से कुछ ही दूरी पर स्थित हैं, तो फिर स्विट्जरलैंड जाकर समझौते करने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लोढ़ा डेवलपर्स के साथ एक लाख करोड़ रुपये के रहेजा समूह के साथ 80 हजार करोड़ रुपये और अल्टा कैपिटल–पंचशील समूह के साथ दो लाख करोड़ रुपये के समझौते किए गए हैं। ये सभी कंपनियां महाराष्ट्र और खासकर मुंबई में सक्रिय हैं। ऐसे समझौते राज्य में रहकर भी किए जा सकते थे। राज्य में निवेश आना सभी के हित में है।

वर्षा ने कहा कि कांग्रेस इसका विरोध नहीं करती। लेकिन सरकार द्वारा किए जा रहे दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर जनता के सामने आना जरूरी है। पिछले वर्ष भी सरकार ने दावोस में 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों का दावा किया था। बावजूद इसके राज्य में बेरोजगारी की समस्या जस की तस बनी हुई है। असल में अब तक कितने समझौते लागू हुए, कितना वास्तविक निवेश राज्य में आया और कितने लोगों को रोजगार मिला, इसकी पारदर्शी जानकारी सामने लाई जाए। राज्य सरकार को इस संबंध में तत्काल श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।

इधर सत्ताधारी दलों का कहना है कि दावोस सिर्फ समझौतों के लिए एक प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स के साथ सीधे बातचीत, नेटवर्किंग और राज्य की क्षमताओं को दिखाने का एक मौका है। विपक्ष झूठे आरोप लगाकर जनता को गुमराह कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार