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विरार-अलिबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर मुआवजा घोटाले में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

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मुंबई, 26 अक्टूबर, (हि. स.)। विरार-अलिबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर परियोजना में सरकारी मुआवजे की राशि को हड़पने के एक बहुत बड़े और सुनियोजित नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस जांच के अनुसार, इस पूरे घोटाले का संभावित पैमाना करीब 2,800 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। मामले में मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड अमित मिश्रा समेत चार लोगों को नायगांव पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया है कि कॉरिडोर के प्रस्तावित मार्ग के अंतर्गत आने वाले कामण, सारजामोरी और पोमण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए गए। आरोपी अमित मिश्रा ने अकेले ही करीब 700 अनधिकृत मकान खड़े किए। ये मकान वास्तव में वर्ष 2022 और 2023 में बनाए गए थे, लेकिन इन्हें प्रोजेक्ट प्रभावित संपत्ति साबित करने और सरकारी मुआवजा पाने के लिए वर्ष 2018-19 के फर्जी हाउस टैक्स (घरपट्टी) दस्तावेज तैयार किए गए। यानी कागजों पर इन मकानों को उनके बनने से 4 साल पहले का दिखा दिया गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने के बदले आरोपियों ने तत्कालीन ग्रामसेवक और कुछ अन्य सहयोगियों को करीब 45 मकान रिश्वत के तौर पर दिए थे। पुलिस इस वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की गहनता से पुष्टि कर रही है। इस महाघोटाले के उजागर होने के बाद, जिलाधिकारी के आदेश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रस्तावित कॉरिडोर की जमीन पर बने लगभग 2,000 अनधिकृत निर्माणों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है।

डीसीपी (परिमंडल-2) अशोक वीरकर ने कहा कि जांच का दायरा ग्राम पंचायत से लेकर राजस्व विभाग तक पहुंच चुका है। पुराने रिकॉर्ड और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शामिल ग्रामसेवक, ग्राम पंचायत कर्मचारियों और राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने संबंधित विभागों से जमीन और टैक्स से जुड़े सभी पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं और आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

हिन्दुस्थान समाचार / कुमार