सेवन हिल्स अस्पताल के निजीकरण को लेकर हंगामा
मुंबई, 21 मई (हि.स.)। मुंबई मनपा द्वारा संचालित अंधेरी के सेवन हिल्स अस्पताल के निजीकरण के मुद्दे को लेकर सियासत गरमा गई है। मनपा प्रशासन के इस फैसले का विपक्ष दलों कड़ा एतराज जताया है। इस प्रस्ताव को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।
कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के नगरसेवकों ने मनपा प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिवसेना (यूबीटी) के नगरसेवक प्रमोद सावंत ने आरोप लगाया कि लगभग 15 लाख वर्ग फुट निर्मित क्षेत्र और करीब 3 हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को मात्र 223 करोड़ रुपये में निजी संस्था को सौंपा जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया में केवल दो बोलीदाताओं को मौका दिया गया था, जिनमें से एक के पीछे हटने के बाद परियोजना एक ही कंपनी को मिल गई। उन्होंने कॅप्री ग्लोबल और रिलायंस के बीच मिलीभगत की आशंका जताई है। उन्होंने मांग की है कि तत्कालीन मनपा आयुक्त ने किसके दबाव में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया, उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस के गुट नेता अशरफ आजमी के अनुसार यह सौदा मुंबई वासियों के हितों के खिलाफ है। अस्पताल की करीब 60 एकड़ जमीन हवाई अड्डे के पास होने के कारण उसकी कीमत लगभग 5 हजार से 7 हजार करोड़ रुपये के बीच है। मूल समझौते के तहत यहां 1,500 बेड वाला अस्पताल संचालित किया जाना था और 20 प्रतिशत मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाना अनिवार्य था। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने न तो प्रॉपर्टी टैक्स चुकाया और न ही लीज का किराया जमा किया। 12 दिसंबर 2025 को कॅप्री ग्लोबल के साथ नया समझौता किया गया और 15 दिसंबर को आचार संहिता लागू होने से पहले ही जल्दबाजी में एनओसी जारी कर दी गई। मनपा में नई सत्ता के गठन का इंतजार किए बिना और 27 मई को सुधार समिति में प्रस्ताव आने से पहले ही निर्णय क्यों लिया गया। अस्पताल को किसी कॉर्पोरेट कंपनी के हवाले करना मुंबईकरों की स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर करने जैसा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

