ठाणे की संजीवनी येयूर में बढ़ा प्रदूषण
मुंबई,04 फरवरी ( हि.स.) । आज मुंबई ठाणे के हरे फेफड़े कहे जाने वाले संजय गांधी नेशनल पार्क और येऊर इलाके में चैन की सांस भी खतरे में है। बढ़ते गाड़ियों के ट्रैफिक, प्राइवेट गाड़ियों और अलग-अलग प्रोग्राम के शोरगुल की वजह से जंगल में प्रकृति पर भी संकट पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर यहां की जंगली जानवरों और बायोडायवर्सिटी पर पड़ रहा है।एनवायरनमेंटलिस्ट डॉ. प्रशांत सिनकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक इमोशनल बयान देकर सरकार का ध्यान इस गंभीर स्थिति की ओर दिलाया है।
येऊर इलाका तेंदुए, हिरण, जंगली सूअर, जंगली बिल्लियों, बंदरों, सांपों के साथ-साथ मोर, उल्लू, किंगफिशर, बढ़ई, बुलबुल, कोयल जैसी कई तरह की चिड़ियों का नेचुरल हैबिटैट है। लेकिन, अभी इस जंगल में कुदरत की आवाज़ें कम हैं और इंसानी गाड़ियों के हॉर्न, तेज़ म्यूज़िक, साउंड सिस्टम और लाइटें ज़्यादा सुनाई देती हैं।
देर रात तक चलने वाली गाड़ियों की आवाजाही और इवेंट्स से होने वाला तेज़ शोर जंगली जानवरों को परेशान कर रहा है और उनके नैचुरल मूवमेंट पर असर डाल रहा है। शांति पर निर्भर यह बायो-चेन धीरे-धीरे टूट रही है। पक्षियों के रहने की जगहें बदल रही हैं, जानवर बेचैनी की वजह से इंसानी बस्तियों की तरफ़ जा रहे हैं। यह चेतावनी तो है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
डॉ. सिनकर ने कहा है, “डेवलपमेंट चाहिए, सुविधाएँ चाहिए; लेकिन ऐसा डेवलपमेंट जो जंगल की आवाज़ को निगल जाए, वह टिकाऊ नहीं होगा।” उन्होंने येऊर और संजय गांधी नेशनल पार्क इलाकों में बढ़ते ट्रैफिक और आवाज़ के प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए ठोस कदम उठाने की ज़रूरत बताई है।
रिपोर्ट में ‘साइलेंट ज़ोन’ को असरदार तरीके से लागू करने, इवेंट्स के लिए आवाज़ की सख्त लिमिट, रात में बेवजह गाड़ियों की एंट्री पर रोक, हॉर्न-फ्री ज़ोन लागू करने के साथ-साथ एक कंट्रोल्ड और इको-फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट सिस्टम की ज़रूरत बताई गई है। जंगल में जंगली जानवरों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए इन्फॉर्मेशन बोर्ड और कैंपेन की भी मांग की गई है।
आज कुदरत बोल नहीं सकती। लेकिन जंगल में बनी यह अजीब सी खामोशी बहुत कुछ कहती है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो येउर और संजय गांधी पार्क में सिर्फ पेड़ों के कंकाल और यादें ही रह जाएंगी, जंगली जानवर नहीं।
पर्यावरण पसंद करने वाले नागरिक उम्मीद जता रहे हैं कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर खुद ध्यान दें और तुरंत ठोस कदम उठाएं।
“जंगल चीखता नहीं, चुपचाप मर जाता है। येउर संजय गांधी पार्क में बढ़ता शोर और ट्रैफिक सिर्फ परेशानी ही नहीं, बल्कि जंगली जानवरों के वजूद पर हमला है। डेवलपमेंट की ज़रूरत है, लेकिन कुदरत का दम घोंटकर नहीं।” –पर्यावरणविद डॉ प्रशांत सिनकर
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

