मार्च में ठाणे में पारा 41व ओजोन स्तर 188खतरे का संकेत
मुंबई,22 मार्च ( हि.स.) ।वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल डे( विश्व मौसम दिवस ) के पृष्ठभूमि में, ठाणे शहर में गर्मी में पारा और हवा में सल्फर डाइऑक्साइड, ओजोन और खतरनाक धूल खतरे के स्तर को पार कर गई है। मार्च की शुरुआत में ही तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से ठाणेकर तप रहे हैं, और हवा में इन ज़हरीले कण के कारण अब जन सेहत का मुद्दा बहुत गंभीर हो गया है।
ठाणे मनपा से मिले आधिकारिक डेटा के मुताबिक, इस महीने के पहले 20 दिनों में से 10 दिन हवा बहुत प्रदूषित रिकॉर्ड की गई है। ओज़ोन लेवल 188 तक पहुँच गया है, और पार्टिकुलेट मैटर (PM10) की मात्रा लगभग 130 रिकॉर्ड की गई है। यह साफ़ हो गया है कि एटमॉस्फियर में हो रहे इन बदलावों की वजह से शहर की एयर क्वालिटी खराब हो रही है।
मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, बढ़ती गर्मी और आबादी के बीच गहरा रिश्ता है। चिलचिलाती धूप की वजह से, ज़मीन के पास गाड़ियों के धुएं, औद्योगिक एमिशन औरनिर्माण कार्य की धूल के केमिकल रिएक्शन से ओज़ोन जैसी नुकसानदायक गैसों का उत्पादन बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण एक 'साइलेंट किलर' बन रहा है, जिसकी वजह से अस्थमा, सांस की बीमारियाँ और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ गया है।
ठाणे-मुंबई इलाके में तेज़ी से हो रही कंक्रीटिंग और घटते ग्रीन एरिया की वजह से शहर में 'अर्बन हीट आइलैंड' का असर बढ़ रहा है। चूँकि सीमेंट के जंगल दिन में गर्मी सोख लेते हैं, इसलिए रात में भी नेचुरल कूलिंग नहीं मिल पाती। गाड़ियों की बढ़ ती संख्या और अलग-अलग जगहों पर कंस्ट्रक्शन का काम इस स्थिति को और खतरनाक बना रहा है।पर्यावरण विशेषज्ञ ने कहा है कि यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के बड़े संकट का हिस्सा है। इससे निपटने के लिए, अब प्रशासन के लिए निर्माण कार्य की धूल को रोकना, जनता परिवहन को चालू करना और बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना ज़रूरी हो गया है। विश्व जलवायु दिवस सिर्फ़ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि पर्यावरण बचाने के लिए ठोस कार्रवाई की अपील होनी चाहिए।
पर्यावरणविद डॉ प्रशांत सिनकर का कहना है कि 41°C का टेम्परेचर और 188 तक पहुँचता ओज़ोन लेवल ठाणेकरों की सेहत के लिए 'रेड अलर्ट' है। सीमेंट के जंगलों की वजह से शहर 'अर्बन हीट आइलैंड' में बदल गया है, और रात में भी नेचुरल कूलिंग नहीं मिल पाती। अब प्रशासन के लिए यह ज़रूरी है कि वह सिर्फ़ कागजी घोड़े नचाने के बजाय, प्रदूषण को कंट्रोल करने और ग्रीन एरिया बढ़ाने के लिए युद्ध स्तर पर ठोस कार्रवाई करे; नहीं तो ठाणे रहने लायक नहीं रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

