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ठाणे में नीनो की वजह से जुलाई में 124% अधिक वर्षा

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ठाणे में नीनो की वजह से जुलाई में 124% अधिक वर्षा


मुंबई,01 अगस्त ( हि.स.) । पैसिफ़िक ओशन में एल नीनो के असर की वजह से इस साल मॉनसून के कमज़ोर रहने का अंदाज़ा था। लेकिन, जुलाई में ठाणे में हुई बारिश ने सभी उम्मीदों को तोड़ दिया और ज़बरदस्त 1,671.40 मिमी (mm )बारिश रिकॉर्ड की गई। यह बारिश पिछले साल जुलाई (2025) के मुकाबले 924.56 मिमी, यानी करीब 124 परसेंट ज़्यादा है।

पर्यावरणविद डॉ प्रशांत ने बताया कि - ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन आपदा प्रबंधन नियंत्रण विभाग के जारी डेटा के मुताबिक, 30 जून, 2026 तक शहर में 411.34 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी। उसके बाद, जुलाई में बारिश की तेज़ी बहुत ज़्यादा बढ़ गई और 31 जुलाई तक कुल बारिश 2,082.74 मिमी तक पहुँच गई। यानी, अकेले जुलाई महीने में 1,671.40 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

पिछले साल 30 जून 2025 तक 809.09 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी। 31 जुलाई 2025 तक कुल बारिश 1,555.93 मिमी थी। इस वजह से जुलाई 2025 में 746.84 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसकी तुलना में, इस साल जुलाई में 924.56 मिमी ज़्यादा बारिश हुई है, यानी लगभग 124 परसेंट ज़्यादा बारिश।

मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, हालांकि एल नीनो मॉनसून पर असर डालने वाला एक ज़रूरी ग्लोबल फैक्टर है, लेकिन यह अकेला तय करने वाला फैक्टर नहीं है। इस साल अरब सागर का टेम्परेचर एवरेज से ज़्यादा रहने, समुद्र से तट की ओर ज़्यादा भाप वाली हवाएं चलने, बार-बार लो प्रेशर एरिया बनने और वेस्ट कोस्ट पर मौसम के अच्छे हालात की वजह से ठाणे समेत मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में भारी बारिश हुई है।

इस साल के मॉनसून ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से बारिश का पैटर्न भी तेज़ी से बदल रहा है। एनवायरनमेंटल एक्सपर्ट डॉ. प्रशांत रवीन्द्र सिनकर ने कहा कि जो बारिश पहले पूरे मौसम में थोड़ी-थोड़ी होती थी, अब बहुत कम समय में बहुत ज़्यादा हो रही है। इसकी वजह से बाढ़, पानी भरने, ट्रैफिक में रुकावट और नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ प्रमोद सालस्कर ने कहा कि - इन दिनों में ऐसी भारी बारिश की घटनाओं के बढ़ने की संभावना को देखते हुए, शहरों में प्राकृतिक नालों और पानी के रास्तों की सुरक्षा, बारिश के पानी का असरदार तरीके से बचाव, सीमेंट-कंक्रीट के इको-फ्रेंडली विकल्प, ग्राउंडवाटर रिचार्ज को बढ़ावा देना और जलवायु परिवर्तन के हिसाब से शहरी प्लानिंग को प्राथमिकता देना ज़रूरी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा