ठाणे की अंतर्गत मेट्रो सफेद हाथी,- मनोज प्रधान ठाणे एनसीपी
मुंबई ,22 अप्रैल ( हि.स.) । क्या ठाणे निवासियों को 12,500 करोड़ रुपये खर्च करके ठाणे अंतर्गत मेट्रो योजना की क्या ज़रूरत है?
ठाणे शहर में आंतरिक मेट्रो पर 12,500 करोड़ खर्च करने के बजाय 1,000 करोड़ रुपये खर्च करके ठाणे महानगर पालिका परिवहनचालू किया जाए, तो ठाणेकरों को हुक्मरानों से लिंक मिल जाएगा। ठाणे एनसीपी एसपी अध्यक्ष मनोज प्रधान ने आज यह सवाल पूछा है कि मेट्रो की वजह से शहर की सड़कें पहले से ही गायब होने लगी हैं, उसमें यह नया घाट क्यों बनाया जा रहा है। हम इस सफेद हाथी सिद्ध हो रहे प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध करेंगे, ।
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के ठाणे शहर प्रेसिडेंट मनोज प्रधान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इंटरनल रिंग रेलवे प्रोजेक्ट को बैरिस्टर नाथ पाई मार्ग, हीरानंदानी एस्टेट और बालकुंभ के ज़रिए ठाणे रेलवे स्टेशन से जोड़ा जाएगा। यह प्रोजेक्ट लगभग 12,500 करोड़ रुपये की लागत से पूरा होगा। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि क्या ठाणेकरों को सच में इस सफेद हाथी जैसी योजना की ज़रूरत है। अगर इस फंड का एक हज़ार करोड़ रुपये ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर खर्च किया जाए और इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएं, तो शहर में ट्रैफिक जाम काफी हद तक कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि मैं खुद रोज़ बैरिस्टर नाथ पाई मार्ग से सफ़र करता हूं। उस सड़क पर घर पहुंचने के लिए हमें कम से कम तीन सिग्नल पार करने पड़ते हैं, वहां इतना ट्रैफिक जाम रहता है। इस प्रोजेक्ट के बाद यह जाम और भी बढ़ जाएगा। सबसे ज़रूरी बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के लिए 37% लोन लिया जाएगा। सरकार के पास पहले से ही पैसा नहीं है, अब यह नया लोन कहां से चुकाया जाएगा और 63% रकम कहां से लाई जाएगी? दूसरी तरफ, कार शेड के लिए 44 एकड़ ज़मीन ली जाएगी। किसान यह ज़मीन देने का विरोध कर रहे हैं। ये किसान ठाणे के हैं। उन्हें ज़मीन से बेदखल करके कौन सा विकास होगा, ।
इस बीच, आनंदनगर और साकेत के बीच सड़क के काम के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं। साथ ही, नगर निगम ने रिंग रेलवे प्रोजेक्ट के लिए करीब तीन हज़ार पेड़ काटने की इजाज़त दी है। जिन वजहों से हम ठाणे में रहने आए थे, अच्छी हवा और हरियाली, अब खतरे में हैं। इसलिए उन्होंने कहा है कि वे इस रिंग रेलवे प्रोजेक्ट के सख्त खिलाफ हैं। मैं कहना चाहूंगा कि जब तक ठाणे के लोग सड़कों पर नहीं उतरेंगे, तब तक हजारों करोड़ रुपये की ऐसी योजनाएं चलती रहेंगी और हम कुछ नहीं कर पाएंगे। उन्होंने यह भी तंज कसा कि अगर कोई जोकर चुना गया तो हम सिर्फ सर्कस देखेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

