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सातारा जिप चुनाव को लेकर महायुति में तनातनी

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मुंबई, 21 मार्च (हि.स.)। महाराष्ट्र के सातारा ज़िला परिषद में हुए नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम ने महायुति में अंदरूनी तनातनी बढ़ा दी है। पहली बार भारतीय जनता पार्टी सातारा ज़िला परिषद में सत्ता बनाने में कामयाब हुई है। हालांकि इसे लेकर महायुति के घटक दल शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी में नाराजगी देखी जा रही है। मंत्री व शिंदे गुट के नेता शंभूराज देसाई ने इस चुनाव को हाई कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है.

भाजपा के पास सिर्फ़ 28 सदस्य थे, लेकिन भाजपा ने अतिरिक्त सदस्यों का समर्थन हासिल कर लिया। भाजपा ने एनसीपी के तीन और शिवसेना के दो सदस्यों को अपने पक्ष में कर लिया। इससे भाजपा का संख्या बल 33 तक पहुंच गया और वह सत्ता पर कब्ज़ा करने में कामयाब रही। इसका श्रेय ,लोक निर्माण मंत्री छत्रपति शिवेंद्रसिंह राजे भोसले को दिया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद, प्रिया शिंदे ज़िला परिषद अध्यक्ष चुनी गईं, जबकि राजू भोसले उपाध्यक्ष चुने गए। इस बीच, इस नतीजे से शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एपी) को बड़ा झटका लगा है। चुनाव से पहले, दोनों पार्टियां स्पष्ट बहुमत होने का दावा कर रही थीं। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि भाजपा ने आखिरी समय में कुछ सदस्यों को अपनी तरफ कर लिया। खास बात यह है कि नई चुनी गई अध्यक्ष प्रिया शिंदे, शिवसेना शिंदे गुट के विधायक महेश शिंदे की पत्नी हैं, इसलिए इस नतीजे ने और भी राजनीतिक रंग ले लिया है। एक तरफ भाजपा की जीत और दूसरी तरफ शिवसेना और एनसीपी की बढ़ती नाराज़गी से सातारा में राजनीति गरमा गई है।

इस पृष्ठभूमि पर मंत्री शंभूराज देसाई ने भाजपा को सीधी चेतावनी दी है। देसाई ने साफ शब्दों में कहा है कि भाजपा ने इसे शुरू किया, अब इसे शिवसेना और एनसीपी मिलकर खत्म करेंगे. उन्होंने हाई कोर्ट में जाने की चेतावनी दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार