शिक्षक पूरी भावी पीढ़ी का निर्माण करते है -उप मुख्य मंत्री शिंदे
मुंबई , 06 सितंबर (हि. स.) I शिक्षा के क्षेत्र में सबको साथ लेकर चलना और कक्षा में हर विद्यार्थी के साथ अपनेपन और सम्मान से पेश आना बहुत ज़रूरी है, यह बात ठाणे के 'सत्कार रेजीडेंसी' में हुए बुक प्रकाशन समारोह में कही गई। डॉ. रेवती श्रीनिवासन की लिखी किताब क्रिएटिंग क्लासरूम्स व्हेयर एवरी चाइल्ड बिलॉन्ग्स को महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे ने लॉन्च किया।इस मौके पर ठाणे के सांसद नरेश म्हस्के, पूर्व सांसद आनंद परांजपे, डिप्टी रीजनल ऑफिसर हेमांगिनी पाटिल के साथ-साथ एजुकेशन सेक्टर के जाने-माने लोग, टीचर और बड़ी संख्या में आम लोग मौजूद थे।इस मौके पर बोलते हुए, उप मुख्य मंत्री डिप्टी ने कहा कि वह शिक्षा के फील्ड में डॉ. रेवती श्रीनिवासन के योगदान की तारीफ़ करते हैं। उन्होंने इस मौके पर अपना विश्वास जताया, विद्यार्थियों के पूर्ण विकास और सभी को बराबर मौके देने के लिए, कक्षा का माहौल सबको साथ लेकर चलने वाला होना चाहिए। यह किताब टीचर्स, पेरेंट्स और एजुकेशन सेक्टर के सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए रोशनी की किरण होगी।
डॉ. रेवती श्रीनिवासन के काम की तारीफ हो रही है। डॉ. रेवती श्रीनिवासन, जो पिछले तीन दशकों से एजुकेशन के फील्ड में लगातार योगदान दे रही हैं, उन्होंने आम बच्चों के साथ-साथ स्पेशल नीड्स वाले, ग्रामीण और पिछड़े ग्रुप्स के बच्चों के लिए थेरेपी सेंटर और स्पेशल एक्टिविटीज़ शुरू करके उन्हें मेनस्ट्रीम में लाया है। लंदन के 'हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स' में उन्हें मिला सम्मान और उन्होंने जो एजुकेशनल विरासत बनाई है, वह सभी ठाणेकरों के लिए गर्व की बात है।
डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे ने प्रोग्राम के दौरान धर्मवीर आनंद दिघे के साथ अपनी यादें ताज़ा कीं, और स्कूल एडमिशन प्रोसेस के लिए आम वर्कर्स और पेरेंट्स की रिक्वेस्ट पर खुद स्कूल आने के पुराने मौकों को भी याद किया।
डॉ. रेवती श्रीनिवासन ने भी इस मौके पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का असली मकसद सिर्फ़ पढ़ना-लिखना नहीं है, बल्कि हर बच्चे की काबिलियत को पहचानना और उसे समाज में आत्म-सम्मान के साथ जीने के लिए मज़बूत बनाना है।
आम विद्यार्थियों के साथ-साथ, स्पेशल ज़रूरतों वाले बच्चों, ग्रामीण और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े ग्रुप के बच्चों के लिए भी कड़ी मेहनत करना ज़रूरी है। इन बच्चों को स्पेशल थेरेपी सेंटर और नई शैक्षानिक कोशिशों के ज़रिए मुख्य धारा में लाया जाना चाहिए और उनकी ज़िंदगी को एक नई दिशा दी जानी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

