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ठाणे में पशुपालकों को कई अनुदान योजनाएं, आवेदन ऑनलाइन करें

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मुंबई, 02 सितंबर (हि. स.) ।ज़िला परिषद, ठाणे के पशु पालन (एनिमल हसबेंडरी ) विभाग के ज़रिए साल 2026-27 के लिए अलग-अलग सब्सिडी वाली स्कीम लागू की जा रही हैं। इसका मकसद ज़िले के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में पशुपालकों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाना, पशुपालन व्यापार को बढ़ावा देना और लगातार इनकम देना है। ठाणे जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी रंजीत यादव ने कहा है कि इन स्कीम का फ़ायदा उठाने के लिए, योग्य पशुपालक 30 सितंबर, 2026 तक ऑनलाइन अप्लाई कर दें,।

तबेला धारकों को स्टॉल लगाने वालों को 60 % सब्सिडी पर अलग-अलग मशीनरी और सामान देने की स्कीम चलाई जा रही है, ताकि वे ज़्यादा आसान, साफ़-सुथरे और फ़ायदेमंद तरीके से डेयरी बिज़नेस कर सकें।

इस स्कीम के तहत, योग्य लाभार्थी कड़बकुट्टी मशीन, दूध निकालने की मशीन, फ्लाई रिपेलेंट मशीन या 3 काऊ मैट जैसी ज़रूरी सुविधाओं का फ़ायदा उठा सकेंगे। मॉडर्न इक्विपमेंट के इस्तेमाल से पशुपालन में मेहनत कम करने और डेयरी बिज़नेस की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पशुपालकों की इनकम बढ़ाने और उन्हें डेयरी बिज़नेस से इनकम का एक टिकाऊ सोर्स देने के लिए 50 परसेंट सब्सिडी पर एक हाइब्रिड गाय या एक भैंस बांटने की स्कीम चलाई जा रही है।

ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में परिवारों को पशुपालन के ज़रिए अतिरिक्त आय देने के लिए 50 % सब्सिडी पर बकरी वर्ग वितरण प्रणाली लागू की जा रही है।

इस स्कीम के तहत, एक बकरी ग्रुप का फ़ायदा 5 बकरियां प्लस + 1 बकरा के रूप में दिया जाएगा। क्योंकि बकरी पालन ग्रामीण इलाकों में छोटे ज़मीन वालों और आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए एक उपयोगी बिज़नेस है, इसलिए यह स्कीम उनकी रोज़ी-रोटी को मज़बूत करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा