ठाणे के कंकरीट साम्राज्य में सांपों को आसरा नहीं तो बस्ती का रुख
मुंबई,16 अगस्त ( हि,. स.) । नागपंचमी त्यौहार नजदीक है।इस मौके पर अक्सर लोगों सर्पों को पूजते है।कुछ प्रतीकात्मकता रूप से तस्वीरों में दूध फूल चढ़ाकर संतुष्ट हो जाते है तो कई लोग सपेरों द्वारा बलात कैद कर लिए गए सर्पों पर दूध उड़ेल कर ही उपलब्धि मनाते हैं।परन्तु बढ़ते कंकरीट के जंगल में इन जीव जंतुओं का जीवन कितना दूभर होता जा रहा है इनके अस्तित्व बचने का सवाल खड़ा हो गया है।ठाणे शहर में भी बढ़ते कंक्रीट, खुली जगहों की कमी और घास के मैदान-झाड़ी वाले रहने की जगहों में कमी से नाग, घोना और धामन जैसे सांपों के कुदरती रहने की जगहों पर असर पड़ रहा है। ये सांप, जो कभी आसानी से दिख जाते थे, अब कई इलाकों में कम होते जा रहे हैं, और उनकी घटती मौजूदगी को ठाणे के बदलते शहरी इकोसिस्टम के लिए एक गंभीर एनवायरनमेंटल चेतावनी माना जा रहा है।बताया जाता है कि इस कंकरीट के भराव से सांपों के रहने की जगह छिन रही है और मजबूरन आश्रय के लिए इंसानों की बस्ती की तरफ रुख करते देखें जाते हैं।
मुंबई - ठाणे के पर्यावरणविद पहले, ठाणे शहर की खुली जगहों, झाड़ियों, घास के मैदानों, झीलों, नदियों और नमी वाली मिट्टी वाली जगहों पर धामन, नाग, घोना समेत कई तरह के सांप पाए जाते थे। जैसे-जैसे शहर फैला, इन कुदरती जगहों पर इमारतें, सड़कें, पार्किंग की जगहें और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए गए। मिट्टी की जगह कंक्रीट ने और झाड़ियों की जगह कंस्ट्रक्शन ने ले ली। एनवायरनमेंटलिस्ट डॉ. प्रशांत सिंकर ने कहा कि इसकी वजह से सांपों के रहने की जगह पर भी असर पड़ता है, साथ ही उनके शिकार जैसे चूहे, मेंढक, छिपकली और दूसरे छोटे जीवों की रहने की जगह पर भी असर पड़ता है।
ठाणे में खाड़ियां, झीलें, पहाड़ियां, पेड़-पौधे और संजय गांधी नेशनल पार्क जैसी कुदरती जगहें हैं। हालांकि, अगर इन रहने की जगहों को एक-दूसरे से अलग कर दिया जाए, तो बायोडायवर्सिटी पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। इसलिए, शहर में बची हुई कुदरती जगहों को बचाना ज़रूरी है।
सांप इकोसिस्टम में ज़रूरी शिकारी होते हैं। क्योंकि कई सांप चूहे, मेंढक और छिपकली खाते हैं, इसलिए वे फूड चेन में बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं। इसलिए, सांपों का होना इकोलॉजिकली ज़रूरी है।
नाग पंचमी के मौके पर सांपों को पकड़ने, उन्हें कैद में रखने या उन्हें दूध पिलाने जैसी आदतों से बचना ज़रूरी है। आस्था बनाए रखते हुए, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि किसी जीव को परेशान न करें। अगर आपको सांप दिखे, तो उसे मारने के बजाय, उससे दूरी बनाए रखें और ट्रेंड सपेरों की मदद लें।
थानेटके सर्प विशेषज्ञ प्रेमियों के अनुसार सांपों को प्रजाति को बात करें तो ठाणे क्षेत्र में बांस जहर वाले सर्पों में धामण, दिवाड, नानेटी, गत्वया,और कुकरी जबकि कम जहरीले सर्पों में हरंतोल,तथा मं जाजरीय मंजर्या, लेकिन यदि हम विषैले नागों के बारे में जानना चाहे तो सिर्फ नाग,घोनस,मन्यार और फुर्से ही जहर छोड़ते हैं।ठाणे इलाके में सांप
पर्यावरणविद प्रशांत रवीन्द्र सिनकर का परामर्श है कि- ठाणे में सांपों की संख्या में कमी शहरी इकोसिस्टम में बदलाव का संकेत है। अतः शहर में विकास योजनाओं के साथ-साथ घास के मैदान, झाड़ियों वाली बेल्ट, झीलें, नदियां, कुदरती मिट्टी और लोकल पौधों के रहने की जगह को बचाना ज़रूरी है। नाग पंचमी पर सांपों की पूजा करने के बजाय, उनके रहने की जगह को बचाना ही असली पर्यावरण सेवा है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

