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मानसिक सेहत हेतू जागरूकता हो - डॉ पवार उप निदेशक स्वास्थ विभाग

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मानसिक सेहत हेतू जागरूकता हो - डॉ पवार उप निदेशक स्वास्थ विभाग


मुंबई, 05 अक्टूबर ( हि. स.) I मन के ज़ख्म भले ही दिखते नहीं, लेकिन उनका दर्द गहरा होता है। इलाज के साथ-साथ, मेंटल बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को समाज के प्यार और स्वीकृति का हाथ भी मिलना चाहिए। स्वास्थ विभाग हेल्थ डिपार्टमेंट के उप निदेशक (डिप्टी डायरेक्टर) डॉ. कैलाश पवार ने कहा कि मेंटल हेल्थ के बारे में गलतफहमियों को दूर करके सेंसिटिविटी और अवेयरनेस बढ़ाना ज़रूरी है।

वर्ल्ड मेंटल हेल्थ वीक पर ठाणे के मनोचिकित्सालय (रीजनल साइकेट्रिक हॉस्पिटल )में जोश के साथ कई अवेयरनेस एक्टिविटीज़ हुईं। सुनिए दर्द: सच्ची आवाज़, सच्चा बदलाव के 2026 के परियोजना के तहत आयोजित की गई इस एक्टिविटी ने यह मैसेज दिया कि समाज को उन लोगों के दर्द, संघर्ष और (रिहैबिलिटेशन) पुनर्वसन यात्रा ( जर्नी) को समझना चाहिए जिन्होंने खुद मेंटल बीमारी का अनुभव किया है, और उनकी आवाज़ मेंटल हेल्थ सर्विसेज़ के सेंटर में होनी चाहिए।

डिप्टी डायरेक्टर डॉ. कैलाश पवार ने प्रोग्राम की अध्यक्षता की। उन्होंने वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे की थीम बताई। उन्होंने कहा कि हेल्थ डिपार्टमेंट के ज़रिए ठाणे, पालघर और रायगढ़ ज़िलों में मेंटल हेल्थ अवेयरनेस, हेल्थ कैंप, आउटपेशेंट सर्विस, रैलियां और अलग-अलग एक्टिविटी लगातार की जा रही हैं। हेल्थ डिपार्टमेंट मेंटल हेल्थ सर्विस को और ज़्यादा बड़ा, आसान और लोगों के लिए बनाने के लिए काम कर रहा है, और उन्होंने भविष्य में इन सर्विस को और ज़्यादा असरदार बनाने का पक्का इरादा जताया।

रीजनल साइकेट्रिक हॉस्पिटल, ठाणे महाराष्ट्र के कई ज़िलों में मेंटल हेल्थ सर्विस देने वाला एक ज़रूरी सेंटर है। इस मौके पर इस बात पर ज़ोर दिया गया कि मेंटल बीमारी के प्रति समाज का नज़रिया बदलने, मरीज़ों और उनके परिवारों को सपोर्ट करने और इलाज के बाद मरीज़ों को समाज की मेनस्ट्रीम में वापस लाने के लिए अवेयरनेस का खास महत्व है।

इस मौके पर मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नेताजी मुलिक ने कहा कि मरीज़ों को सिर्फ़ मरीज़ के तौर पर नहीं बल्कि परिवार के सदस्य के तौर पर प्यार, सम्मान और सेंसिटिविटी के साथ देखना ज़रूरी है। सही इलाज के साथ देखभाल वाला माहौल देने से मरीज़ों के रिहैबिलिटेशन में बहुत मदद मिलती है।

अस्पताल के आउटपेशेंट डिपार्टमेंट में मेंटल बीमारी, गलतफहमियों, इलाज और रिहैबिलिटेशन के बारे में अवेयरनेस फैलाने के लिए एक थीम वाली पोस्टर एग्ज़िबिशन लगाई गई थी। ऑक्यूपेशनल थेरेपी डिपार्टमेंट में, इलाज के बाद ठीक हुए मरीज़ों के इंस्पायरिंग सफ़र पर बनी फ़िल्में दिखाई गईं। कुछ मरीज़ों को उनके परिवारों के साथ सम्मानित किया गया। इस पहल से यह पॉजिटिव मैसेज दिया गया कि सही इलाज, परिवार के सपोर्ट और समाज से मंज़ूरी मिलने पर मेंटल बीमारी से ठीक होना मुमकिन है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा