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ठाणे में सीमेंट सड़को से झुलसी बस्ती, पारा 31 होने से उमस बढ़ी

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मुंबई, 03 अक्टूबर ( हि. स.) इस बार फिर अक्टूबर की बेमौसमी गर्मी की लहर ठाणे के शहरी डिज़ाइन पर भी सवाल उठा रही है। जहाँ ज़्यादा से ज़्यादा तापमान 37 डिग्री तक पहुँच गया है, वहीं आधी रात को भी पारा 29 से 31 डिग्री के बीच है। बढ़ती कंक्रीटिंग, डामर की सतहों और पेड़ों की घटती संख्या के कारण, दिन में जमा होने वाली गर्मी रात में भी बनी रहती है।

जैसे-जैसे ठाणे शहर फैल रहा है, खुली ज़मीनों की कंक्रीटिंग, बड़े पैमाने पर कंस्ट्रक्शन, डामर की सड़कें और ट्रैफिक में बढ़ोतरी शहर के लोकल क्लाइमेट पर असर डाल रही है। कंक्रीट और डामर दिन भर सूरज की गर्मी सोखते हैं। चूँकि यह गर्मी सूरज डूबने के बाद धीरे-धीरे वातावरण में निकलती है, इसलिए रात में तापमान में उम्मीद के मुताबिक कमी नहीं होती है। शहरों में दिखने वाला यह प्रोसेस 'अर्बन हीट आइलैंड' इफ़ेक्ट से जुड़ा है।

ठाणे में बढ़ती गर्मी के पृष्ठभूमि में बड़े पेड़ों की बहुत अहमियत है। पेड़ न सिर्फ़ छाया देते हैं, बल्कि पारदर्शिता के ज़रिए इलाके में गर्मी कम करने में भी मदद करते हैं। इसलिए, सड़कों के किनारे, पब्लिक जगहों पर और रिहायशी इलाकों में लगे पुराने, बड़े पेड़ शहर के लिए कुदरती तापमान नियंत्रक का भूमिका निभाते हैं। हालांकि, अगर विकास के कामों और अलग-अलग परियोजना के नाम पर बड़े पेड़ों की संख्या कम होती है, तो इसका असर शहर के क्लाइमेट पर पड़ेगा, ऐसा पर्यावरणविद विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत सिनकर ने कहा।

खुली ज़मीनों का भी भूगोलिक महत्व होता है। कुदरती मिट्टी कंक्रीट के मुकाबले सूरज की गर्मी को अलग तरह से संभालती है और बारिश के पानी को मिट्टी में रिसने में मदद करती है। हालांकि, अगर खुली जगहें पूरी तरह से कंक्रीट से ढकी हों, तो पानी के मिट्टी में रिसने की क्षमता कम हो जाती है। इसका असर सतही जल ( ग्राउंडवॉटर) रिचार्ज, लोकल उमस (ह्यूमिडिटी )और शहर के पूरे इकोलॉजिकल बैलेंस पर पड़ता है।

इसलिए, 'अक्टूबर हीट' को सिर्फ़ कुछ दिनों के बढ़े हुए टेम्परेचर के तौर पर देखना सही नहीं होगा। एडमिनिस्ट्रेशन को शहर की बनावट, ज़मीन के इस्तेमाल, पेड़ बचाने, पानी के सोर्स की सुरक्षा और ग्रीन एरिया के टेम्परेचर के साथ रिश्ते पर गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है। वैसे तो ठाणे जैसे तेज़ी से डेवलप हो रहे शहर में डेवलपमेंट ज़रूरी है, लेकिन प्लानिंग के सेंटर में एनवायरनमेंट को रखना भी ज़रूरी है ताकि उसे नेचुरल रिसोर्स की कीमत न चुकानी पड़े।

शहर का टेम्परेचर कम करने के लिए सिर्फ़ पेड़ लगाने के कैंपेन काफ़ी नहीं हैं। लगाए गए पेड़ों को बचाना, बड़े पेड़ों की सुरक्षा करना, खुली जगहों को बनाए रखना, पानी के रिसोर्स को बचाना, बारिश का पानी ज़मीन में सोखने वाले तरीकों को बढ़ावा देना और जहाँ भी हो सके ग्रीन बेल्ट बनाना ज़रूरी है। भविष्य की सिटी प्लानिंग में कंक्रीट एरिया के साथ-साथ ग्रीन एरिया की मात्रा को भी ज़रूरी माना जाना चाहिए।

प्रसिद्ध पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ प्रशांत रविंद्र सिनकर का मानना है कि - ठाणे में 37 डिग्री का टेम्परेचर और आधी रात को 29 से 31 डिग्री की गर्मी अक्टूबर की गर्मी के साथ बढ़ते कंक्रीटीकरण की खतरे की घंटी है। अगर ठाणे को अपनी ठंडक बनाए रखनी है, तो डेवलपमेंट के साथ-साथ पेड़ों और खुली जगहों की सुरक्षा भी ज़रूरी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा