हरियाणा से गुम महिला को ठाणे मेंटल हॉस्पिटल ने अपनों से मिलाया
मुंबई, 30जुलाई ( हि.स.) । बाबा... शब्द को उसके होठों पर वापस आने में छह महीने लग गए। हरियाणा से लापता हुई एक लड़की, जो अपनी पहचान भूल चुकी थी, और उसका परेशान परिवार... लेकिन ठाणे के रीजनल साइकेट्रिक हॉस्पिटल के डॉक्टरों, नर्सों, सोशल सर्विस डिपार्टमेंट और वागले एस्टेट पुलिस की सेंसिटिव कोशिशों की वजह से आखिरकार एक परिवार की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।
3 जनवरी, 2026 को, यह जानकारी मिलने के बाद कि कविता (बदला हुआ नाम) नाम की एक 45 साल की महिला तीन हट नाका इलाके में रो रही है, PSI शशिकांत जाधव और महिला पुलिस मनीषा सूल ने उसे कस्टडी में ले लिया। कविता को ठाणे रीजनल साइकेट्रिक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया क्योंकि वह अपनी पहचान नहीं बता पा रही थी और उसमें मेंटल इलनेस के लक्षण दिख रहे थे।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नेताजी मुलिक की गाइडेंस, प्यार भरी देखभाल, लगातार काउंसलिंग और साइंटिफिक ट्रीटमेंट से कविता की हालत में काफी सुधार हुआ। वह बोलने लगी; लेकिन उसे अपनी पहचान और घर का पता याद नहीं था। साइकेट्रिस्ट डॉ. अमोल भुसारे ने बताया कि ट्रीटमेंट के दौरान एक अहम सुराग मिला कि वह हरियाणवी बोली में बात कर रही थी।
सोशल सर्विस सुपरिटेंडेंट नितिन शिवड़े से लगातार बातचीत के बाद कविता ने अपना नाम और गांव बताया। इसके बाद हरियाणा में उचाना पुलिस से कॉन्टैक्ट किया गया और फोटो भेजी गई। जांच में पता चला कि वह अक्टूबर 2025 से लापता थी। कई महीनों से उसे ढूंढ रहे परिवार वाले पुलिस स्टेशन पहुंचे।
ठाणे मनोरोग चिकित्सालय के अधीक्षक ने बताया कि - कई महीनों बाद अपनी बेटी को देखकर उसके पिता ने कविता को कसकर गले लगा लिया। दोनों की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे। परिवार ने हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन को धन्यवाद दिया। वार्ड इंचार्ज मंगला सांखे, साइकेट्रिक नर्स आशा डावरे, कोमल कटके के साथ-साथ डॉक्टर, नर्स, सोशल सर्विस डिपार्टमेंट और दूसरे स्टाफ ने इस काम में कीमती योगदान दिया। *सही इलाज, सब्र और इंसानियत से मेंटल बीमारी के मरीज़ों की ज़िंदगी फिर से खिल सकती है। आज, हमारे लिए इससे बड़ी खुशी की कोई बात नहीं है कि एक पिता अपनी खोई हुई बेटी को फिर से गले लगा पाया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

