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डॉ शुभांगी धुंधले नेत्रों के लिए मसीहा बनी, हजारों को दी रोशनी

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डॉ शुभांगी धुंधले नेत्रों के लिए मसीहा बनी, हजारों को दी रोशनी


मुंबई,07 मार्च ( हि.स.) । आँखें… इंसान की ज़िंदगी का सबसे कीमती तोहफ़ा। दुनिया देखने, लोगों को पहचानने और सपने सजाने की ताकत इन्हीं दो छोटी आँखों में छिपी होती है। और जब ये आँखें धुंधली हो जाती हैं, तो न सिर्फ़ नज़र चली जाती है बल्कि ज़िंदगी से भरोसा भी डगमगा जाता है। ऐसे समय में अगर कोई ऐसा मिल जाए जो हाथ थामकर फिर से रोशनी दिखाए, तो वह इंसान डॉक्टर नहीं; फरिश्ता होता है।ठाणे जिला सिविल अस्पताल की सर्जन डॉ शुभांगी यूं तो चिकित्सा क्षेत्र मे किसी पहचान की मोहताज नहीं है मगर जिस हौंसले से वह अपनी सेवा में मशगूल रहती है उसका हर मरीज कायल है।उन्होंने नेत्रहीन होती आंखों को नई रोशनी दिखाई है।जिनका कोई आसरा नहीं होता है वह मरीज ठाणे जिला सिविल अस्पताल में आंखों में आशा की किरण जगाए आते है ।लेकिन पिछले कई सालों से डॉ शुभांगी ने न केवल अपनी कार्य कुशलता से बल्कि अपने उदार व्यवहार से लोगों का दिल जीता है । ठाणे जिला सिविल अस्पताल के डॉक्टर सर्जन कैलाश पवार और कई प्रसिद्ध चिकित्सकों ने भी डॉ शुभांगी की कुशलता का लोहा माना है।उन्होंने शुभांगी के उज्जवल भविष्य की कामना की है।

समाजसेवी और पर्यावरणविद व पत्रकार प्रशांत का कहना है कि ठाणे जिला सिविल हॉस्पिटल की आँखों की डॉक्टर डॉ. शुभांगी नितिन अंबाडेकर एक तरह से आँखों के लिए फरिश्ता बन गई हैं। सरकारी हॉस्पिटल में काम करते हुए उन्होंने हज़ारों मोतियाबिंद और ग्लूकोमा की सर्जरी कामयाबी से की हैं। लेकिन उनकी महानता सिर्फ़ नंबरों में नहीं है; बल्कि हर मरीज़ के साथ उनके बने रिश्ते में है।मरीज़ों की लंबी करतार लगी रहती है सिविल अस्पताल की ओपीडी में कई लोग प्रायोरिटी के तौर पर “शुभांगी मैडम को दिखाओ” रिक्वेस्ट करते देखे गए। क्योंकि उन्हें पता है कि यहां सिर्फ इलाज की गारंटी ही नहीं, बल्कि अपनापन भी मिलता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा