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अन्य राज्यों के वाहनों पर आरटीओ की सख्ती

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मुंबई, 04 अक्टूबर (हि.स.)। मुंबई सहित महाराष्ट्र में अन्य राज्यों के नंबर प्लेट लगाकर बेधड़क दौड़ रहीं गाड़ियों पर आज से लगातार 12 दिनों तक आरटीओ की सख्ती रहेगी। एक वर्ष से अधिक समय से टिके ऐसे 'बाहरी' वाहनों की पहचान के लिए विशेष निगरानी टीमें तैनात की गई हैं। राज्य परिवहन विभाग ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों को बख्शा नहीं जाएगा।

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 47 के तहत किसी राज्य में पंजीकृत वाहन को दूसरे राज्य में 12 महीने तक चलाया जा सकता है। इसके बाद यदि वाहन को महाराष्ट्र में ही रखना और इस्तेमाल करना है, तो मालिक को फिर से पंजीकरण के लिए आवेदन करना और लागू मोटर वाहन टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों के अनुसार वाहन राज्य में लाने के सात दिनों के भीतर पंजीकरण प्राधिकरण को आवश्यक जानकारी देना भी अनिवार्य है। परिवहन विभाग को संदेह है कि कुछ वाहन मालिक महाराष्ट्र में लागू अपेक्षाकृत अधिक मोटर वाहन टैक्स से बचने के लिए गाड़ियों का पंजीयन दूसरे राज्यों में करा रहे हैं। इसकी जांच के लिए परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर ने सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों और उप-क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों को सत्यापन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

मुंबई समेत एमएमआर, औद्योगिक व वाणिज्यिक क्षेत्रों, आवासीय परिसरों और बड़े पार्किंग स्थलों पर विशेष नजर रहेगी। अन्य राज्यों के वाहनों की जांच के लिए प्रवर्तन दल, उड़न दस्ते और जांच चौकियां तैनात होंगी। आरटीओ अधिकारी दस्तावेजों और साक्ष्यों से वाहनों के महाराष्ट्र में इस्तेमाल की अवधि जांचेंगे। रोजाना जांच, उल्लंघन, कार्रवाई, जब्ती और वसूले गए कर का ब्यौरा देना होगा। अभियान के बाद परिवहन आयुक्त को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। अस्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने वाले नौ आरटीओ से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। इनमें ठाणे आरटीओ से 1,272, पिंपरी-चिंचवाड़ से 1,061, वडाला से 754, नवी मुंबई से 617, पनवेल से 571 और नागपुर से 387 प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं।

इस अभियान के साथ ही परिवहन विभाग राज्य में वर्ष 2025-26 के दौरान डीलरों द्वारा बेचे गए 5,664 उच्च मूल्य वाले वाहनों की भी अलग से जांच कर रहा है। ये वाहन महाराष्ट्र में बेचे गए, लेकिन बाद में दूसरे राज्यों में पंजीकृत कराए गए। इनमें लग्जरी और स्पोर्ट्स कारों के साथ क्रेन, ट्रक और खुदाई मशीनें भी शामिल हैं। प्रत्येक वाहन की कीमत करीब 50 लाख से 3 करोड़ रुपए तक बताई गई है। विभाग का अनुमान है कि यदि इन वाहनों का पंजीकरण महाराष्ट्र में हुआ होता, तो राज्य को करीब 2,500 करोड़ से 3,000 करोड़ रुपए तक का राजस्व मिल सकता था। जांच के लिए संबंधित आरटीओ क्षेत्रों में तीन से चार वरिष्ठ मोटर वाहन निरीक्षकों को तैनात किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार