मुंबई में बढ़ा मलेरिया-डेंगू का खतरा
मुंबई, 15 जुलाई (हि.स.)। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बारिश के कारण मलेरिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू और लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ गया है। मानसूनी बिमारियों को बढ़ता देख बीएमसी प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है और जरूरी उपाय शुरु कर दिए गए हैं।
मुंबई मनपा ने घर-घर सर्वे, निर्माण स्थलों की जांच, रक्त परीक्षण, फॉगिंग और वेक्टर नियंत्रण अभियान तेज कर दिया है। साथ ही नागरिकों से जमा पानी से बचने, मच्छरों की रोकथाम के उपाय अपनाने और जोखिम वाले क्षेत्रों में लेप्टोस्पायरोसिस रोधी दवा लेने की अपील की है। मुंबई में मच्छरजनित और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में मलेरिया, डेंगू और अन्य मानसूनजनित संक्रमणों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। लगातार बारिश से कई स्थानों पर पानी जमा होने के कारण लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा भी बढ़ा है।
बीएमसी ने जून और जुलाई में स्पेशल कंस्ट्रक्शन ड्राइव के तहत 3,000 निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान 54,763 मजदूरों के रक्त नमूनों की जांच की गई, जिनमें 37 मजदूर मलेरिया से संक्रमित पाए गए और उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराया गया। 1 जून से 14 जुलाई के बीच 10.69 लाख घरों का सर्वे, 36.81 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच, 1,00,472 रक्त नमूने एकत्र किए गए और 96 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। इसके अलावा 90,728 कार्यालयों और कार्यस्थलों का निरीक्षण किया गया तथा 4,938 नागरिकों को लेप्टोस्पायरोसिस की रोकथाम के लिए प्रोफिलेक्सिस दवा दी गई।
वेक्टर नियंत्रण अभियान के तहत 49,599 संभावित मच्छर प्रजनन स्थलों का निरीक्षण किया गया, जहां27,382 5,341 एनोफिलीज और 22,041 एडीज मच्छरों के प्रजनन स्थल मिले। 66,595 कबाड़ और पुराने टायर हटाए गए, जबकि 51,937 भवन परिसरों और 7.94 लाख झोपड़ियों में फॉगिंग की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

