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स्लम डेवलेपमेंट कानून की समीक्षा, कमेटी की पहली बैठक संपन्न

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मुंबई, 11 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र में झोपडपट्टी पुनर्विकास प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और गति प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए इस संबध में गठित विशेषज्ञ समिति को अगले 10 महीनों के भीतर अपनी विस्तृत सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपनी होंगी। समिति की सहायता के लिए एसआरए के विभिन्न विभागों जैसे इंजीनियरिंग, वित्त, भूमि अधिग्रहण, और नगर योजना के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक उप-समिति का गठन भी किया जाएगा।

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेशानुसार गठित विशेषज्ञ समिति की पहली समीक्षा बैठक हाल ही में संपन्न हुई। इस बैठक में महाराष्ट्र झोपडपट्टी क्षेत्र (सुधार, उन्मूलन व पुनर्विकास) अधिनियम, 1971 के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। कोर्ट में दायर सुओ मोटो जनहित याचिका के तहत दिए गए आदेशों के अनुपालन में सरकार के गृहनिर्माण विभाग ने 31 जुलाई 2026 को इस विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। अदालत ने कानून के प्रभावशीलता की जांच (परफॉर्मेंस ऑडिट) करने और विकासकों, भूमि स्वामियों, सहकारी समितियों तथा कानूनी विशेषज्ञों के सुझावों को ध्यान में रखकर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। समिति की पहली बैठक मं अधिनियम की वर्तमान स्थिति और पुनर्विकास में आने वाली बाधाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि झोपडपट्टी वासियों को सम्मानजनक जीवन शैली मिले और झोपडपट्टी-मुक्त शहर का सपना जल्द साकार हो सके। पुनर्विकास से जुड़े प्रशासनिक व तकनीकी कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक नीतिगत बदलावों पर भी चर्चा हुई। बैठक में गृहनिर्माण एवं नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता, झोपडपट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (एसआरए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेंद्र कल्याणकर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार