सरकारी डॉक्टरों पर अंकुश, नहीं कर सकते निजी प्रैक्टिस
मुंबई, 02 अगस्त (हि.स.)। बॉम्बे हाई कोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर खंडपीठ ने महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि सरकारी मेडिकल अधिकारी निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकते। साथ ही कोर्ट ने इस विषय पर लंबे समय से लंबित सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस की बंदी को कायम रखा है।
राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार कोर्ट ने यह फैसला बीते गुरुवार को सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सरकारी सेवा में काम करने वाले मेडिकल अधिकारी महाराष्ट्र सिविल सर्विस रूल्स और सरकारी पॉलिसी से बंधे हैं। उनसे फुल-टाइम सरकारी सेवा देने की उम्मीद की जाती है। सरकारी सेवा में रहते हुए उन्हें प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिस करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कानूनी जानकारों व हेल्थ सेक्टर के विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला पब्लिक हेल्थ सिस्टम को मज़बूत करने के लिहाज़ से बहुत जरूरी होगा. जो सरकारी सेवाओं में अनुशासन, जवाबदेही और मरीजों की भलाई को प्राथमिकता देता है। ग्रामीण और शहरी इलाकों के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल अधिकारियों की मौजूदगी और मरीज सेवा इसे असरदार बनाने में मदद करेगी।
इस अहम केस में सरकार की तरफ से असिस्टेंट सरकारी वकील अतुल काले ने असरदार तरीके से बहस की। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के लीगल एडवाइजर एडवोकेट सतीश भेंडेकर ने कानूनी मामलों को सुलझाने, जरूरी दस्तावेज को पूरा करने और कोऑर्डिनेट करने में सरकार को पूरा सहयोग दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

