पुश्तैनी ज़मीन के अलॉटमेंट सर्टिफिकेट पर पंजीकरण शुल्क माफ
मुंबई, 20 अप्रैल (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के किसानों और आम जनता को बड़ी राहत देते हुए खेती की ज़मीन के अलॉटमेंट सर्टिफिकेट पर लगने वाली रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह से माफ कर दिया है। इस बारे में राजस्व विभाग ने सर्कुलर जारी कर दिया है।
महाराष्ट्र लैंड रेवेन्यू कोड, 1966 के सेक्शन 85 के तहत आने वाले मामलों सहित आपसी सहमति से रजिस्ट्रेशन के लिए आने वाली पुश्तैनी खेती की ज़मीन के अलॉटमेंट सर्टिफिकेट को रजिस्ट्रेशन फीस से पूरी तरह से छूट दे दी गई है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर लिया है।
सरकार की तरफ से 23 जून 2025 को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, सेक्शन 85 के तहत एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए खेती की ज़मीन के अलॉटमेंट पर कोई रजिस्ट्रेशन फीस नहीं ली जाएगी। इस सेक्शन के तहत अलॉटमेंट जारी करने का अधिकार तहसीलदार के पास है। लेकिन कई नागरिक आपसी सहमति से तहसीलदार के पास जाए बिना सीधे सेकेंडरी रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रेशन के लिए अलॉटमेंट जमा कर रहे थे। सरकार के ध्यान में आया कि सेकेंडरी रजिस्ट्रार ऑफिस इस आधार पर रजिस्ट्रेशन फीस ले रहे थे कि ओरिजिनल नोटिफिकेशन में कोई साफ प्रोविजन नहीं था।
किसानों के बीच इस असमंजस को दूर करने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। राजस्व विभाग के अनुसार सेक्शन 85 के तहत तहसीलदार स्तर पर किए गए अलॉटमेंट के रजिस्ट्रेशन के लिए कोई फीस नहीं ली जाएगी। जिन सभी को-ओनर्स को विरासत में पुश्तैनी खेती की ज़मीन मिली है, उनके द्वारा सीधे रजिस्ट्रेशन ऑफिस में जमा किए गए अलॉटमेंट पर भी अब रजिस्ट्रेशन फीस से छूट मिलेगी। एक ही परिवार के सदस्यों के बीच खेती की ज़मीन के बंटवारे के दस्तावेज़ पर कोई फ़ीस नहीं लगेगी। इस फ़ैसले से खेती की ज़मीन के बंटवारे का खर्च बचेगा और झगड़ों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।
राजस्व मंत्री बावनकुले ने बताया कि अगर एक ही परिवार के सदस्य आपस में पुश्तैनी ज़मीन बांटते हैं तो रजिस्ट्रेशन फ़ीस माफ करने का फ़ैसला किया गया था। यह अधिकार तहसीलदार के पास था। लेकिन कुछ लोग सीधे सेकेंडरी रजिस्ट्रार के ऑफ़िस जाकर पंजीकरण करा रहे थे। नियम साफ न होने की वजह से रजिस्ट्रेशन फ़ीस लग रही थी। इस समस्या को दूर करने के लिए अब आप तहसीलदार या रजिस्ट्रेशन ऑफ़िस कहीं भी जाएं, कोई फ़ीस नहीं देनी होगी. इससे राज्य के सभी किसानों को फ़ायदा होगा.
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

