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दीपके की हिरासत पर भड़के राज ठाकरे

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मुंबई, 10 अक्टूर (हि.स.)। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर आंदोलन करने जा रहे सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके की हिरासत को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे तानाशाही करार दिया है और लोकतंत्र के लिए घातक बताया है।

राज ठाकरे वे सरकार से पूछा है कि क्या देश में विरोध प्रदर्शन नहीं होने चाहिए? क्या आप सवाल नहीं पूछना देने चाहते? 'आप विरोध करने का अधिकार छीनने वाले कौन होते हैं?' इस देश की आजादी और अभिव्यक्ति की आजादी की कीमत किसी नेता की अंधभक्ति या उसके बुरे बर्ताव को हवा देने के लिए कुर्बान नहीं की जानी चाहिए। मोदी और शाह की जोड़ी के दिमाग में बहुत ज्यादा तानाशाही है। इसी तानाशाही के दम पर इस जोड़ी ने देश के सभी इंस्टीट्यूशन पर कब्ज़ा करके सत्ता हासिल की है। सत्ता का इस्तेमाल सिर्फ मुट्ठी भर उद्योगपतियों के फायदे के लिए किया जा रहा है। मोदी किस मुंह से पूरी दुनिया में जाकर बताएंगे कि हमारे देश में लोकतंत्र है? क्या यही असली लेकतंत्र है? ज्ञानेश कुमार ने कोई गड़बड़ी की है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। पूरा इलेक्शन सिस्टम ईमानदार और पारदर्शी होना चाहिए।

राज ने कहा कि भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1)(अ) और (ब) के तहत नागरिकों को शांति से विरोध करने का पूरा हक है, उन्होंन कहा कि नेटफ्लिक्सवर पर एक डॉक्युमेंट्री है, हाउ टू बिकम अ टाइरेंट (टाइरेंट का मतलब है तानाशाह शासक) जिसे अमित शाह शायद हर दिन गंभीरता से देखते हैं। इसके बजाय महात्मा गांधी के शांतिपूर्ण विरोध और स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में पढ़ें, जो आपके जैसे ही गुजरात राज्य से आए थे। आप आज सत्ता में हैं, यह उम्मीद न करें कि यह हमेशा रहेगी। आप सत्ता का अमरत्व लेकर पैदा नहीं हुए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार