ठाणे पूर्व में गतिविधि थमी, बारिश,खुदी सड़क व दलदल से बदहाली-डॉ प्रशांत
मुंबई,1 नवंबर ( हि.स.)। ठाणेवासी जहाँ पहले से ही बारिश से परेशान थे, वहीं इमारतों की खुदाई से निकली मिट्टी सड़क पर फैल जाने से कोपरी इलाका कीचड़ के दलदल में तब्दील हो गया है। इस कीचड़ के कारण पैदल यात्री, स्कूली छात्र, नौकरानियाँ और दोपहिया वाहन चालक जान हथेली पर लेकर यात्रा कर रहे हैं। ठाणे के पर्यावरणविद प्रशांत सिनकर सड़क पर यात्रा करना अब एक 'जोखिम भरा सफ़र' बन गया है। ठाणे मनपा प्रशासन की उपेक्षा और लापरवाही से ठाणे पूर्व क्षेत्र के निवासियों में आक्रोश व्याप्त है।
बताया जाता है कि लगातार विलंब से चल रही पुनर्विकास परियोजनाओं के काम के लिए हर दिन सुबह से देर रात तक चलने वाली खुदाई और डंपरों के आवागमन के कारण सड़क पर कीचड़ की एक परत जम जाती है। जैसे ही बारिश का पानी उस पर पड़ता है, कीचड़ बन जाता है और यातायात बाधित होता है। दोपहिया वाहनों का फिसलना, कपड़े गंदे होना जैसी घटनाएँ अब रोज़मर्रा की बात हो गई हैं। कुछ जगहों पर, कीचड़ में फिसलकर नागरिकों को मामूली चोटें भी आई हैं।
कोपरी इलाके में बड़े पैमाने पर पुनर्विकास कार्य चल रहा है। लेकिन इन कार्यों की उचित निगरानी न होने के कारण सड़कें दलदल जैसी हो गई हैं। डम्पर चालक निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी को ढकते नहीं हैं, जिससे मिट्टी सड़क पर फैल जाती है और कुछ ही घंटों में सड़क फिसलन भरी हो जाती है। नागरिकों को घरों से बाहर निकलने के लिए पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती।
स्थानीय निवासियों का कहना है, मानसून का मौसम कीचड़, धूल और यातायात की अव्यवस्था लेकर आया है। फिर भी, संबंधित प्रशासन निष्क्रिय भूमिका निभा रहा है। मानसून से पहले सड़क मरम्मत और मिट्टी प्रबंधन के निर्देश दिए जाने के बावजूद, नागरिक इस बात से नाराज़ हैं कि उनकी अनदेखी की गई है।
स्थानीय निवासियों ने ठाणे नगर निगम से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। हर दिन लाखों रुपये कमाने वाला नगर निगम नागरिकों की दुर्दशा पर चुप क्यों है? यह सवाल उठाते हुए, निवासियों ने मिट्टी हटाने और सड़कों की सफाई के लिए तत्काल एक टीम नियुक्त करने की मांग की है। नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि कोपरित में पुनर्विकास के नाम पर चल रहे इस कीचड़ मार्च को रोकने के लिए प्रशासन अब जाग जाए।
ठाणे पूर्व के एक अन्य गणमान्य नागरिक सुनील नाइक का कहना है कि चूँकि स्कूल और कार्यालय समय के दौरान इन सड़कों पर भीड़भाड़ रहती है, इसलिए दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई है। रिक्शा और दोपहिया वाहन चालक अब ऐसी कीचड़ भरी सड़कों से बचने लगे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

