मृत्युपरांत अंगदान संकल्प, ठाणे मनोचिकित्सालय मुहिम ने बोध बढ़ाया
मुंबई,13 अगस्त ( हि,. स.) । राज्य में लोक स्वास्थ्य विभाग के ‘जुग जुग जियो अभियान’ के तहत प्रादेशिक मनोचिकित्सालय , ठाणे में अंग दान (ऑर्गन डोनेशन) के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए कई गतिविधियां की गईं, जिससे मौत के बाद भी दूसरों को नई ज़िंदगी मिलती है।आज 13 अगस्त तक चलने वाले ऑर्गन डोनेशन पखवाड़े के मौके पर मरीज़ों, रिश्तेदारों, कर्मचारियों और नागरिकों को ऑर्गन डोनेशन के महत्व के बारे में समझाकर लोगों को जागरूक किया गया।
यह कार्य प्रणाली मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नेताजी मुलिक के मार्गदर्शन में की गई। अंग दान से किसी व्यक्ति की मौत के बाद कई ज़रूरतमंद मरीज़ों को नई ज़िंदगी मिल सकती है। हालांकि, समाज में फैली गलतफहमियों को दूर करना और इस बारे में सही और वैज्ञानिक तरीके से जानकारी देना ज़रूरी है।
इसके लिए हॉस्पिटल में ऑर्गन डोनेशन का सामूहिक संकल्प, QR कोड के ज़रिए ऑर्गन डोनेशन रजिस्ट्रेशन और पोस्टर के ज़रिए लोगों को जागरूक किया गया। मरीज़ों, उनके रिश्तेदारों, अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्रों और मौजूद नागरिकों ने इस गतिविधियों पर अपने आप रिस्पॉन्स दिया।
मनोचिकित्सा संस्थान (मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूशन )में भी ऑर्गन डोनेशन के बारे में जागरूकता फैलाना ज़रूरी है। मेंटल बीमारी होने का मतलब यह न हीं है कि किसी व्यक्ति का सोशल कंट्रीब्यूशन खत्म हो जाता है। हॉस्पिटल के ज़रिए सही मेडिकल और लीगल क्राइटेरिया के हिसाब से ऑर्गन डोनेशन के बारे में जानकारी देकर संवेदनशीलता पैदा करने की कोशिश की गई। ऑर्गन डोनेट करें, ज़िंदगी डोनेट करें... इस मैसेज के साथ रीजनल साइकेट्रिक हॉस्पिटल ने सामाजिक प्रतिबद्धता और इंसानियत की चेतना बढ़ाई।
ठाणे मनोचिकित्सालय के अधीक्षक नेताजी मुलिक ने इस मौके पर कहा कि -ऑर्गन डोनेशन एक ऐसा रेजोल्यूशन है जो इंसानियत को ज़िंदा रखता है। हमारे एक फैसले से दूसरे व्यक्ति को नई ज़िंदगी की उम्मीद मिल सकती है। इसलिए, ऑर्गन डोनेशन के बारे में पब्लिक अवेयरनेस सिर्फ़ एक पखवाड़े तक लिमिटेड नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज के हर लेवल तक पहुंचनी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

