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बारामती में 2029 में 'पवार बनाम पवार'?

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मुंबई, 23 अप्रैल (हि.स.)। महाराष्ट्र की राजनीति में साल 2029 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से चर्चाओं का बाजार गर्म हो रही है। साल 2024 के लोकसभा व विधानसभा चुनाव में बारामती में 'पवार बनाम पवार' का मसला साल 2029 के आम चुनावों में भी नजर आने के आसार हैं। अभी साढ़े तीन साल बाकी हैं, लेकिन अभी से जय पवार और युगेंद्र पवार के बीच संभावित लड़ाई की चर्चा राजनीतिक गलियारों में शुरू हो गई है।

एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने हाल ही में संकेत दिया था कि 2029 में बारामती में चाचा-भतीजों के बजाय एक बार फिर चचेरे भाइयों के बीच सियासी भिड़ंत हो सकती है। उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार के बेटे जय पवार और श्रीनिवास पवार के बेटे युगेंद्र पवार के आमने-सामने होने की संभावना जताई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए युगेंद्र पवार के पिता श्रीनिवास पवार ने सावधानी भरा रुख अपनाया है, लेकिन एक इशारा करने वाला बयान दिया है कि जय 2029 में चुनाव लड़ेंगे और सुनेत्रा हट जाएंगी।

श्रीनिवास पवार के अनुसार नई पीढ़ी आज़ाद ख्यालों वाली है। हालांकि उम्मीदवारी पर आखिरी फैसला शरद पवार और संबंधित पार्टी ही करेगी। अभी जय पवार अजित पवार की एनसीपी को रिप्रेजेंट कर रहे हैं, जबकि युगेंद्र पवार शरद पवार गुट में एक्टिव हैं। इसलिए, बारामती की तस्वीर तभी साफ होगी जब भविष्य में दोनों पार्टियां का विलय होगी या वे अलग-अलग लड़ेंगी।

रोहित पवार ने इस मामले के पीछे गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि कुछ नेता पवार परिवार में फूट डालकर राजनीतिक सर्कल खत्म करना चाहते हैं. इसीलिए 'पवार बनाम पवार' की लड़ाई थोपी जा रही है। उन्होंने कहा कि अजित दादा रहते तो दोनों पार्टियों का विलय हो जाता और वे साल 2029 में मुख्यमंत्री बनते. उनके जाने के बाद दोनों दलों के विलय का विषय खत्म हो गया है. जय पवार का कहना है कि मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं, भविष्य में पार्टी क जो आदेश होगा, उसे स्वीकार करूंगा.

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार