मुंबई के सात कोलीवाड़ों के विकास का रास्ता साफ, तीन महीने में होगा सीमांकन
मुंबई, 10 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई शहर की सात कोलीवाड़ों के सीमांकन के मुद्दे को सुलझाने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सुझाव और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल पर किया गया है। सातों कोलीवाड़ा का विकास होगा। इससे असली भूमि पुत्रों को न्याय मिलने के साथ ही उन्हें कानूनी अधिकार और जमीनों का संरक्षण मिल सकेगा।
कोंकण विभाग के कमिश्नर की अध्यक्षता में बनाई गई नौ सदस्यीय यह कमेटी सीमांकन मैप पर मिली आपत्तियों पर विचार करेगी और तीन महीने के अंदर सरकार को एक सिफारिश रिपोर्ट देगी। यह कमेटी मुंबई की सात कोलीवाड़ों शिवड़ी, सायन, कोलाबा, माहिम (माहिम मार्केट सहित), मांडवी-प्रिंसेस डॉक, वर्ली और कफ परेड की हदबंदी का प्रोसेस पूरा करने के लिए बनाई गई है। मुंबई में कोलीवाड़ियों की हदबंदी के लिए असल साइट सर्वे और माप करने के बाद पहले नक्शा तैयार किए गए थे। इन नक्शों में दिखाई गई सीमाओं को लेकर अलग-अलग प्राधिकरणों ने आपत्तियां दर्ज कराई गई थी। इसलिए सरकार ने हदबंदी को फाइनल करने के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया है।
कोंकण विभाग कमिश्नर की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में कमिश्नर ऑफ़ सेटलमेंट व डायरेक्टर, भूमि अभिलेख, महाराष्ट्र स्टेट, पुणे मनपा के अतिरिक्त आयुक्त (शहर), मुंबई व मुंबई उपनगर के जिलाधिकारी, पर्यावरण व जलावायु परिवर्तन विभाग के निदेशक, मत्स्य व्यवसाय विभाग के सहायक आयुक्त का समावेश है। कोकण प्रदेश के उपनिदेशक, भूमि अभिलेख कमेटी के सदस्य सचिव हैं। कमेटी मुंबई शहर जिलाधिकारी द्वारा तैयार किए गए सात कोलीवाड़ों के सीमांकन मैप पर विचार करेगी। इन मैप पर मिली आपत्तियों को संबंधित आपत्तिकर्ताओं और कोली संगठनों के प्रतिनिधियों का पक्ष सुना जाएगा। उसके बाद सीमांकन को फाइनल करने के लिए सरकार को सिफारिश की जाएगी।
इसके अलावा कमेटी राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 9 सितंबर 2024 को हुई मीटिंग के निर्देशों के अनुसार ज़रूरी कार्रवाई पर भी विचार करेगी। कमेटी को जरूरत के हिसाब से संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों को मीटिंग के में बुलाने का अधिकार दिया गया है। कमेटी को तीन महीने के अंदर सरकार को अपनी सिफारिश रिपोर्ट जमा करनी है।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि कोली समुदाय मुंबई के मूल निवासी हैं। उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार का पहला कर्तव्य है। मुख्यमंत्री फडणवीस के सुझाव के बाद यह आदेश तुरंत लागू करने के साथ जारी किया गया है। करीब 12 साल से लंबित यह मुद्दा हल हो जाएगा। कमिटी को मामले की बहुत पारदर्शी तरीके से स्टडी करने और तीन महीने के अंदर अपनी सेल्फ-एक्सप्लेनेटरी रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है। सरकार सभी मछुआरे की जमीन की रक्षा करने और उनके किसी भी अधिकार का उल्लंघन किए बिना शीघ्र डेवलपमेंट के काम पूरे करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

