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कांग्रेस नेता वडेट्टीवार का आरोप, 254 एकड़ से ज़्यादा सरकारी जमीन प्राइवेट बिल्डरों को दी गई

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मुंबई, 09 मई (हि.स.)। मीरा भायंदर में सैकड़ों एकड़ सरकारी ज़मीन के मालिकाना हक को लेकर राज्य में सियासत फिर गरमा गई है। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि 254 एकड़ से ज़्यादा सरकारी ज़मीन प्राइवेट बिल्डरों के फ़ायदे के लिए डायवर्ट की गई है।

वडेट्टीवार ने कहा कि मीरा भायंदर के इलाके में करीब 254.88 एकड़ ज़मीन असल में राज्य सरकार की थी। सरकार से पहले से इजाजत लिए बिना इस ज़मीन के रिकॉर्ड बदल दिए गए। जिलाधिकारी ने इस ज़मीन को सरकार को ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, लेकिन उसके बाद वरिष्ठ स्तर पर इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इससे प्रशासन की भूमिका पर शक पैदा हो रहा है।

वडेट्टीवार ने सवाल उठाया है कि अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, सीधे मालिकाना हक का फैसला एक प्राइवेट कंपनी के पक्ष में कैसे आ गया? क्या सरकारी वकील सो रहा था? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खजाने में पैसे की कमी है, निजी बिल्डरों को करोड़ों रुपये की ज़मीन देने की कोशिश की जा रही है। अब आलोचना के बाद भले ही सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रही हो, लेकिन हाई कोर्ट का फैसला आने तक सरकार क्या कर रही थी।

शिवसेना (ठाकरे गुट) के सांसद संजय राऊत ने कहना है कि सारी ज़मीनों की लूट हो रही है। बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश से मीरा भायंदर में 294.66 एकड़ सरकारी ज़मीन प्राइवेट मकान मालिकों और रियल एस्टेट कंपनियों के हाथ में कैसे चली गई? यह ज़मीन शुरू में पूरी तरह से सरकार की थी। इसे लीज़ पर दिया गया था, लेकिन 1980 से मीरा रियल एस्टेट डेवलपर्स, मीरा साल्ट वर्क्स, एस्टेट इन्वेस्टमेंट वगैरह जैसी प्राइवेट कंपनियों ने अलग-अलग कोर्ट के आदेशों (1996, 2002, 2018) के ज़रिए इस ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया। जिला मजिस्ट्रेट के कुछ फ़ैसलों से भी प्राइवेट पार्टियों को फ़ायदा हुआ। अब महाराष्ट्र सरकार ने मान लिया है कि यह ज़मीन पूरी तरह से सरकारी है। इसलिए, उसने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन फ़ाइल करने का फ़ैसला किया है। यह ठीक है, लेकिन अगर किसी एक मंत्री ने अपने अधिकार में ऐसा फ़ैसला लिया होता, तो यही कोर्ट उस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाता।

मीरा-भायंदर के करीब 6000 करोड़ रुपये मूल्य की 254.88 एकड़ जमीन को लेकर महाराष्ट्र में बड़ा कानूनी और राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। विपक्ष के मोर्चा खोलते ही सरकार बैकफुट पर आ गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा इस जमीन को प्राइवेट कंपनियों के पक्ष में मान्यता दिए जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रही है। राज्य सरकार ने इस मामले में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दाखिल करने का फैसला किया है।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने साफ संदेश दिया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से सरकार का पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार