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कर्जत टोरेंट पावर प्लांट पर फेक नेरेटिव फैला रहा विपक्ष- मुख्यमंत्री फडणवीस

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मुंबई, 25 अक्टूबर (हि.स.)। रायगढ़ जिले के कर्जत में प्रस्तावित टोरेंट कंपनी के पावर प्लाट को लेकर विपक्ष आक्रामक है। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा है कि विपक्ष फेक नेरेटिव फैला रहा है। 18 महीने तक सभी सुनवाई का सामना करने और कानूनी मंजूरी मिलने के बाद ही यह प्रोजेक्ट लागू किया जा रहा है।

इंडिया ज्वेलरी पार्क के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडिया ज्वेलरी पार्क की नींव रखी गई। हम 40 हजार से 50 हजार करोड़ रुपये निवेश कर रहे हैं। यहां 1 लाख नौकरियां मिलेंगी। यह देश का सबसे बड़ा पार्क होगा। लगातार अलग-अलग नैरेटिव बनाए जा रहे हैं। भारत देश के कुल एक्सपोर्ट का 58 प्रतिशत एक्सपोर्ट महाराष्ट्र करता है। महाराष्ट्र अभी भी इस फील्ड में लीडर है। जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट काउंसिल ने हमसे जगह मांगी थी। इस पार्क के बनने के बाद, महाराष्ट्र जेम्स एंड ज्वेलरी के फील्ड में लीडर बना रहेगा।

कर्जत में प्रस्तावित टोरेंट कंपनी की जलविद्युत परियोजना के लिए पेड़ काटे जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे फेक नैरेटिव के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता। हमारे पास पंप स्टोरेज है, यानी हाइडल पावर, जो क्लीन पावर है। यह नॉन-पॉल्यूटिंग एनर्जी है। हमारे पास सोलर से ज्यादा कैपेसिटी है। लेकिन हमारा पीक आवर सोलर के बाद है। अगर हम उसके लिए कोयले की पावर का इस्तेमाल करेंगे तो प्रदूषण होगा। लेकिन यह परियोजना क्लीन एनर्जी इस्तेमाल करने के मकसद से है। इसमें 3 हज़ार मेगावाट बिजली बनेगी। यह पूरी तरह से क्लीन एनर्जी है। जो जमीन ली गई है, उस पर झीलें बनाई जाएंगी। बदले में कंपनी ने वन विभाग को तीन गुना ज़मीन दी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वन विभाग 90 हज़ार पेड़, 30 हज़ार पेड़ और 60 हज़ार पेड़ लगाएगा। अगर हमें यह बिजली नहीं मिली तो हमें कोयले की पावर खरीदनी पड़ेगी। इससे जो प्रदूषण हम बचना चाहते हैं, उसके लिए हमें 28 करोड़ पेड़ लगाने होंगे। दूसरी बात है कि अगर हम कुल 3 हजार मेगावाट थर्मल पावर से होने वाले प्रदूषण का हिसाब लगाएं, तो इससे उतना ही प्रदूषण होगा जितना 40 लाख कारों से होगा। हम एक पर्यावरण पूरक क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट ला रहे हैं। सारा निवेश महाराष्ट्र से है और एनर्जी पर भी पहला हक महाराष्ट्र का होगा। यह प्रोजेक्ट भीमाशंकर जंगल से 16 किलोमीटर दूर है और मंदिर से 20 किलो मीटर दूर है। झूठी कहानी बनाना महाराष्ट्र विरोधी काम है। किसी की रोजी-रोटी नहीं जाएगी। अगर ऐसा होता है, तो इस पर भी विचार किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट एक दिन में बनने वाला प्रोजेक्ट नहीं है। हम गांव वालों की बात सुनेंगे और कोई रास्ता निकालेंगे। यह परियोजना सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए है कि समाज का कोई भी तबका वंचित न रहे। लेकिन राजनीति के लिए फैलाई जा रही झूठी कहानी सही नहीं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार