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मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्यमिता योजना के लिए शीघ्र ऑनलाइन सिस्टम

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मुंबई, 7 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्यमिता योजना के नाम पर फर्जीवाड़े की शिकायतों को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। सरकार ने लोगों से सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले भ्रामक विज्ञापनों से सावधान रहने की अपील की है। योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए जल्द ही ऑनलाइन आवेदन प्रणाली शुरू की जाएगी।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के लिए किसी भी गैर-सरकारी व्यक्ति, एजेंसी या संस्था को आवेदन जमा करने अथवा दस्तावेज एकत्र करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है। इसके बावजूद कुछ कंपनियों द्वारा योजना के नाम पर लोगों से दस्तावेज जमा कराने की शिकायतें सामने आई हैं।

पशुपालन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी झूठे विज्ञापन या प्रचार के झांसे में न आएं। आवेदन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की परेशानी या संदेह होने पर नागरिक अपने नजदीकी पशु चिकित्सा क्लिनिक या पशुपालन विभाग के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1962 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

राज्य कैबिनेट ने सरकारी निर्णय के तहत मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्यमिता योजना को मंजूरी दी है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन के माध्यम से रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाना है। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को सब्सिडी के आधार पर दुधारू गाय, भैंस, बकरी, भेड़, मुर्गी और सूअर जैसे पशुधन उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

पशुपालन विभाग के अनुसार योजना को पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए ऑनलाइन प्रणाली विकसित की जा रही है और इसका काम अंतिम चरण में है। इस प्रणाली के माध्यम से जल्द ही आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। आवेदन के दौरान लाभार्थियों से 7/12 उतारा, राशन कार्ड, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र सहित आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन मांगे जाएंगे।

आवेदक आधार कार्ड नंबर अथवा सरकार के महा-डीबीटी पोर्टल से प्राप्त महाआईडी नंबर के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। विभाग ने दोहराया है कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले किसी भी व्यक्ति या निजी संस्था को दस्तावेज या पैसे न दें।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि योजना से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए केवल सरकारी माध्यमों पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित फर्जी विज्ञापनों से बचें।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार