खुले मसाले बेचे तो खैर नहीं, एफडीए का फरमान
मुंबई, 15 अक्टूबर (हि.स.)। गुटखा कारोबार, दवा और रेस्टोंरेंट पर सख्ती बरतने के बाद अब महाराष्ट्र खाद्य व औषधि प्रशासन (एफडीए) ने मसाला कारोबारियों की ओर रूख किया है। अब खुले मसले बेचने वालों की खैर नहीं होगी। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने फरमान जारी किया है कि मिलावट की संभावनाओं को देखते हुए खुले मसाले बेचने पर प्रतिबंध होगा।
मसाला निर्माताओं और विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। एफडीए की टीमें मसाला बनाने वाली इकाइयों, कारखानों और दुकानों का निरीक्षण कर सकती हैं। जांच के लिए नमूने लेकर प्रयोगशाला में भेजे जाएंगे। नमूनों में प्रतिबंधित रंग या केमिकल पदार्थ पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में लाइसेंस रद्द करने और आपराधिक मामला दर्ज करने का भी प्रावधान है। मसालों के उत्पादन, भंडारण और बिक्री से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। मसालों में प्रतिबंधित कृत्रिम रंगों और हानिकारक केमिकलों की मिलावट पर रोक लगा दी गई है। हल्दी, लाल मिर्च, धनिया और अन्य पिसे मसालों को आकर्षक रंग देने के लिए हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है। ऐसी मिलावट से शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
मिलावट रोकने के लिए एफडीए ने अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। राज्य के सात विभागों में 19,713 खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई. इस दौरान 892 लाइसेंस निलंबित किए गए और 1,538 प्रतिष्ठानों को कारोबार बंद करने की सूचनाएं दी गईं हैं। इस अभियान में 27.86 करोड़ रुपये का भंडार जब्त किया गया है। अन्य संदिग्ध, घटिया और मिलावटी खाद्य पदार्थों का 50.63 करोड़ रुपये का सामान भी जब्त किया गया है। कुल जब्ती का कीमत 78.49 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस कार्रवाई के दौरान 1,175 प्राथमिकी दर्ज की गईं और 1,529 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

