ठाणे ईस्ट में कृत्रिम झील की अनदेखी मात्र 88 गणेश विसर्जन,
मुंबई, 17 सितंबर ( हि. स.) I बप्पा के विसर्जन से भक्तों की पसंद साफ हो गई; अब इको-फ्रेंडली सिस्टम की दिशा तय करने का समय है। ठाणे ईस्ट के अष्टविनायक चौक पर कृत्रिम झील में सिर्फ 88 मूर्तियां विसर्जित की गईं, जबकि चेंदानी कोलीवाड़ा पोर्ट पर ठाणे खाड़ी में बने विसर्जन घाट पर 525 मूर्तियां विसर्जित की गईं। इससे एक बार फिर साफ हो गया है कि भक्त कृत्रिम झीलों के बजाय खाड़ी, नदी या बहते पानी को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए, भक्तों की इस पसंद को ध्यान में रखते हुए, इको-फ्रेंडली विसर्जन सिस्टम पर फिर से सोचने की जरूरत है।
पर्यावरण के नजरिए से, सिर्फ 'मूर्ति कहां विसर्जित की गई?' से ज्यादा जरूरी यह है कि 'विसर्जन के बाद इसे कैसे मैनेज किया गया?' मूर्तियों, रंगों और सजावटी सामान का पानी पर असर देखने के साथ-साथ विसर्जन के बाद बचे हुए हिस्सों का वैज्ञानिक प्रबंधन भी जरूरी है।
ठाणे मनपा (म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) के मुताबिक,कृत्रिम झीलों में विसर्जित की गई मूर्तियों को वापस ठाणे क्रीक में नहीं फेंका जाता है। इसलिए, यह साफ करना ज़रूरी है कि कृत्रिम झीलों, लोहे के टैंकों और मूर्ति एक्सेप्टेंस सेंटर से रिकॉर्ड की गई 20,703 मूर्तियों के आंकड़े में ठाणे क्रीक में विसर्जन शामिल है या नहीं। चूंकि चेंदनी कोलीवाड़ा पोर्ट पर 525 मूर्तियों का शदुमति-POP के हिसाब से वर्गीकरण साफ नहीं है, इसलिए यह सवाल उठा है कि कुल 9,600 शदुमति और 11,103 पीओ पी POP मूर्तियों की संख्या किस आधार पर तय की गई। जब प्रदुषण नियंत्रण विभाग से संपर्क किया गया, तो बताया गया कि विसर्जन के संबंधित आंकड़े वार्ड के हिसाब से सहायक आयुक्तों से मिले थे।
अगर भक्त बप्पा की मूर्तियों को किसी खाड़ी, नदी या बहते पानी में विसर्जित करना पसंद करते हैं, तो इस बात को ध्यान में रखते हुए म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को तलवपाली के दत्त घाट की तरह एक पक्का और साइंटिफिक विसर्जन घाट बनाने की अध्यन करना चाहिए। इसके साथ ही, एक कृत्रिम झील को भी एक विकल्प के तौर पर रखना चाहिए।
ठाणे के पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ प्रशांत रविंद्र सिनकर का कहना है कि - भक्तों की पसंद तो साफ़ है, लेकिन इको-फ़्रेंडली विसर्जन सिस्टम पर फिर से सोचना ज़रूरी है। एक आर्टिफ़िशियल झील एक ऑप्शन हो सकती है; लेकिन, खाड़ी में भी विसर्जन के लिए एक परमानेंट, साइंटिफ़िक और ट्रांसपेरेंट सिस्टम बनाया जाना चाहिएI
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

