आर्थिक संबंधों से परे सांस्कृतिक संवाद की आवश्यकता- मुख्यमंत्री फडणवीस
मुंबई, 05 सिंतंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि विभिन्न देशों के बीच रिश्तों में केवल व्यापार व आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि इंसानी मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और आपसी बातचीत को भी प्राथमिकता देने की ज़रूरत है. भले ही अलग-अलग देशों की संस्कृतियां, परंपराएं और जीने के तरीके अलग-अलग हों, लेकिन इंसानियत को जोड़ने वाले यूनिवर्सल मूल्य एक जैसे हैं. इन आम मूल्यों को खोजकर सांस्कृतिक लेन-देन, आपसी सम्मान और बातचीत का दायरा बढ़ाकर, एक ज़्यादा संतुलित, शांतिपूर्ण व खुशहाल दुनिया बनाना संभव है।
मुख्यमंत्री फडणवीस की मौजूदगी में ‘ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम 2026’ के दूसरे एडिशन का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर भारत समेत कई देशों के प्रतिनिधि, उद्योगपति, विद्वान और सांस्कृतिक हस्तियां मौजूद थीं। मुंबई में ब्राज़ील के कॉन्सुल जनरल जोस मौरो फोंसेका कोस्टा काउटो, रूस के कॉन्सुल जनरल इवान फेटिसोव, चीन के कॉन्सुल जनरल किन टी और दक्षिण अफ्रीका के कॉन्सुल जनरल गेडियन लाबेन मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे मौके ढूंढना ज़रूरी है जो अलग-अलग देशों को एक साथ लाएं। ग्लोबल सिस्टम विभिन्न स्तर पर असंतुलित हो रहा है। भले ही संस्कृति, परंपरा और विचारधारा अलग हों, लेकिन बातचीत से कॉमन वैल्यूज़ पर आधारित आपसी समझ बनाई जा सकती है। केवल आर्थिक संबंध और ट्रेड से दुनिया बेहतर नहीं बन सकती। इंसानी महत्व पर आधारित बातचीत और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जरूरी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार 'वसुधैव कुटुम्बकम' है और भारत ने दुनिया को जीवन का यह नजरिया दिया है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। इतिहास में भारत ने सिर्फ़ सामान और व्यापार ही नहीं फैलाया, बल्कि दुनिया भर में विचार, ज्ञान और जीवन के मूल्यों को भी फैलाया है। भारत से अलग-अलग देशों में पहुंची बौद्ध विचारधारा का उदाहरण देते हुए फडणवीस ने कहा कि इसका फैलाव युद्ध या हिंसा से नहीं, बल्कि विचारों और मूल्यों के असर से हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

