मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति लोकतंत्र के लिए खतरा – संजय निरुपम
मुंबई, 21 जनवरी (हि.स.)। शिवसेना (शिंदे गुट) के उपनेता व प्रवक्ता संजय निरुपम ने मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति को लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया है। उन्होंने मुस्लिम इलाकों को दंगाइयों और ब्लास्ट के आरोपियों के रहने की जगह बताते हुए, इन इलाकों पर पैनी नजर ऱखने की मांग की है।
मुंबई प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए निरपम ने कहा कि मालेगांव, परभणी, मुंब्रा, संभाजीनगर, भिवंडी और मानखुर्द जैसे इलाकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई खतरा पैदा न हो क्यूं की यह जो इलाका है वो दंगाइयों और ब्लास्ट के आरोपियों को संरक्षण देने वाला इलाका बन गया है यहाँ से चुनकर आए उम्मीदवारों और इन्हे चुनकर लाने वालो पर कड़ी नजर रखी जाए। मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस और ठाकरे गुट को वोट किया है। महाराष्ट्र में एमआईएम का बढ़ता प्रभाव राज्य की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। मुम्ब्रा में एमआईएम उम्मीदवार की जीत के बाद दिए गए बयान समाज में तनाव पैदा करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि हजार साल के शासन में भी कोई देश को हरा नहीं कर सका खिलजी , तुगलक और मुग़ल की कोशिश नाकाम रही तो अब मुम्ब्रा की गलियों से कुछ आवाजे क्या इसे हरा कर पाएगी।
निरूपम ने कहा कि नागपुर दंगे के आरोपी फहीम की पत्नी का एमआईएम से जीतकर आना और मालेगांव जैसे इलाकों में विवादित तत्वों को संरक्षण मिलना गंभीर विषय है। उन्होंने मांग की कि ऐसे क्षेत्रों में चुने गए प्रतिनिधियों और उन्हें वोट देने वालों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, जो कभी सभी समाज की पार्टी मानी जाती थी, अब सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक की पार्टी बनती जा रही है। परभणी में उबाठा के जो उम्मीदवार जीते हैं, उनमें दो-तिहाई मुस्लिम समाज से हैं। यह बाला साहब ठाकरे के विचारों से पूरी तरह अलग दिशा है। ठाकरे भाइयों ने हिंदू वोट को बांटा, जिसका फायदा मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति ने उठाया। अब हिंदू मतदाताओं को सतर्क रहने की जरूरत है।
बिहार भवन के निर्माण के फैसले का स्वागत करते हुए निरुपम ने कहा कि इससे इलाज के लिए आने वाले बिहार के लोगों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने बिहार भवन का विरोध करने वालों की मानसिकता पर सवाल उठाए और कहा कि जनता ने ऐसे विरोध को नकार दिया है। उन्होंने ठाकरे भाइयों को याद दिलाया कि प्रबोधनकार ठाकरे ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उनका मूल मगध क्षेत्र से था, जो आज के बिहार में आता है। जो खुद बिहार से है वो खुद बिहार का विरोध करते है ऐसे में बिहार का विरोध करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

