मुंबई मनपा ने वसूले 7,309 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स
मुंबई, 19 अप्रैल (हि.स.)। मुंबई मनपा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7,309.77 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली की है। यह राशि 9,820.59 करोड़ के कुल लक्ष्य का लगभग 73 प्रतिशत वसूल हो चुकी है। टैक्स रिकवरी रेट ठीक-ठाक है, लेकिन कुछ कैटेगरी में कम वसूली के कारण प्रशासन के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं।
कुल 11.07 लाख पेमेंट में से लगभग 39.94 लाख यूनिट पर टैक्स लगाया गया है। इसमें रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी सबसे बड़ी कैटेगरी है और 8.61 लाख पेमेंट में से 22.05 लाख यूनिट पर 1,978.12 करोड़ की डिमांड की गई थी। इसमें से,604.49 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं।
सबसे ज़्यादा राजस्व कमर्शियल प्रॉपर्टी कैटेगरी से मिला है। 4.60 लाख यूनिट्स से 1.71 लाख पेमेंट में 3,115.40 करोड़ रुपये मांगे गए, जिसमें से 2,892.24 करोड़ रुपये वसूले गए। इस कैटेगरी में ज़्यादा रिकवरी रेट से बीएमसी के खजाने को बड़ी बढ़त मिली है।
मिक्स्ड प्रॉपर्टी कैटेगरी में, 40,010 पेमेंट में 12.63 लाख यूनिट्स से 1,617.84 करोड़ रुपये की डिमांड थी। जिसमें से 1,230.57 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं। देखा गया है कि इस कैटेगरी में अभी भी रिकवरी बढ़ाने की ज़रूरत है। इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टीज़ से 171.19 करोड़ रुपये की डिमांड में से 152.98 करोड़ रुपये वसूले गए। प्लॉट कैटेगरी में सबसे ज़्यादा अंतर देखा गया है। जहां 2,938.03 करोड़ रुपये की डिमांड थी, वहीं सिर्फ़ 1,429.49 करोड़ रुपये ही वसूले गए हैं। इस कैटेगरी में सिर्फ आधी रकम ही रिकवर हुई है।
प्रॉपर्टी टैक्स मुंबई मनपा के रेवेन्यू का एक बड़ा स्त्रोत माना जाता है। इसलिए इस टैक्स में अंतर सीधे तौर पर नागरिक सेवाओं पर असर डाल सकता है। खासकर, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सड़क मरम्मत, ड्रेनेज सिस्टम में सुधार और हेल्थ सुविधाओं के लिए फंड की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है। यदि उम्मीद के मुताबिक रिकवरी नहीं हुई, तो इससे विकास के कामों की रफ़्तार पर असर पड़ने की संभावना है।
रिकवरी रेट ठीक-ठाक है, लेकिन मनपा के सामने अलग-अलग कैटेगरी में असंतुलन और बकाया को देखते हुए टैक्स प्रबंधन को और बेहतर बनाने की चुनौती है। इन आंकड़ों से साफ़ है कि शहर की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए प्रॉपर्टी टैक्स वसूली में समानता और अनुशासन बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार टैक्स नेट को मज़बूत करना, डिफॉल्टर्स के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करना और डिजिटल सिस्टम के जरिए पारदर्शिता बढ़ाना ज़रूरी है। इसके अलावा, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और वैल्यूएशन प्रोसेस को अपडेट करके रेवेन्यू ग्रोथ को बढ़ाया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

