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ठाणे में स्पैरोताई फाउंडेशन की ‘गौरैया बचाओ ,पहल में विद्यार्थियों से संदेश

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ठाणे में स्पैरोताई फाउंडेशन की ‘गौरैया बचाओ ,पहल में विद्यार्थियों से संदेश


ठाणे में स्पैरोताई फाउंडेशन की ‘गौरैया बचाओ ,पहल में विद्यार्थियों से संदेश


मुंबई, 20 मार्च ( हि . स.) । स्पैरोताई फाउंडेशन हर साल कई तरह की पहल करता है, जो गौरैया बचाने, प्रकृति बचाने के बारे में जागरूकता पैदा करने का काम कर रहा है। इस संस्था के फाउंडर डॉ. राज परब और डॉ. ज्योति परब पिछले पंद्रह सालों से लगातार गौरैया के बचाव और संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। यह संस्था पूरे महाराष्ट्र में सक्रिय है।

हाल के सालों में, बढ़ते शहरीकरण की वजह से गौरैया की संख्या तेज़ी से कम हो रही है। आज के विद्यार्थी कल के लिए एक अच्छा भविष्य बना सकते हैं, इस बात को ध्यान में रखते हुए, स्पैरोताई फाउंडेशन ने ठाणे के 50 स्कूलों के सैकड़ों विद्यार्थियों में गौरैया के लिए जागृति और प्यार पैदा करने और उन्हें गौरैया बचाने के तरीके बताने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया।

इस मौके पर विद्यार्थियों ने गौरैया पर आधारित सुंदर तस्वीरें बनाईं और गौरैया बचाने पर अपने विचार बताए, जबकि टीचर्स ने कचरे से गौरैया के लिए सुंदर और सस्टेनेबल फीडर बनाए।

स्पैरोताई फाउंडेशन की मेंबर सुश्री साक्षी परब ने विद्यार्थियों से गौरैया के बारे में सवाल पूछे और सही जवाब देने वाले विद्यार्थियों को आकर्षक 'स्पैरो वॉल हैंगिंग्स' देकर सराहा गया। इस प्रोग्राम में विद्यार्थियों ने सेव स्पैरो, सेव नेचर और लव स्पैरो, सेव स्पैरो मैसेज वाली गांधी कैप पहनीं और नारे लगाए वापस आओ, ये गौरैया!, हम सबने तय किया है कि हमें गौरैया बचानी है। जबकि विद्यार्थियों और मौजूद लोगों ने ऐसे मैसेज वाले प्लेकार्ड लेकर गौरैया के बारे में अवेयरनेस फैलाई। विद्यार्थियों के लिए गौरैया की तस्वीर के साथ बनाया गया एक सेल्फी पॉइंट भी मेन अट्रैक्शन था। प्रोग्राम के आखिर में, अलग-अलग स्कूलों से आए शिक्षक और विद्यार्थियों को खास मेहमानों ने आकर्षक सर्टिफिकेट दिए, साथ ही पक्षियों को खाना, पानी और रहने की जगह देने के लिए मिट्टी के बर्तन, फीडर और घोंसले भी दिए। इस मौके पर, स्पैरोताई फाउंडेशन महाराष्ट्र के फाउंडर डॉ. राज परब और डॉ. ज्योति परब ने कहा, “बचपन में हम अपने घर के आस-पास गौरैया देखते थे, उनकी चहचहाहट से माहौल खुशनुमा हो जाता था। लेकिन, आज गौरैया की संख्या कम होती जा रही है। इन छोटी चिड़ियों को बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है। इसके लिए सभी को अपने घरों के पास उनके लिए पानी, खाना और रहने की जगह का इंतज़ाम करना चाहिए,” उन्होंने अपील की। इस प्रोग्राम में सोशल वर्कर माणिक पाटिल, कोंकण संभाग टीचर नॉन-टीचिंग सेक्रेटरी गोकुल पाटिल, इंग्लिश स्कूल के फाउंडर रघुनाथ अडसुल, महाराष्ट्र जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन डिस्ट्रिक्ट लाइजन चीफ प्रकाश माली, ठाणे सिटी सेक्रेटरी निशिकांत महांकल और स्टेट लाइजन चीफ राजेंद्र गोसावी खास मेहमान थे। स्पैरोताई फाउंडेशन की लाइजन चीफ श्रीमती प्रणाली गिरी ने सभी स्कूलों से संपर्क करने और विद्यार्थियों और शिक्षकों को एक साथ लाने का मुश्किल काम संभाला।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा