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लीवर देकर मां ने बचाया अपने जिगर का टुकड़ा

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मुंबई, 09 मई (हि.स.)। मुंबई के वाडिया अस्पताल में एक मां ने अपना जिगर देकर अपने जिगर के टुकड़े यानी बेटे को नया जीवन दिया। लगभग 10 घंटे तक चली जटिल सर्जरी के बाद बच्चे को नया जीवन मिला। मां और बेटे दोनों स्वस्थ्य हैं।

मुंबई की रहने वाली 34 वर्षीय गृहणी ज्योति विजय सिंह ने अपने 6 वर्षीय बेटे प्रियांश के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला लिया। प्रियांश को पेट में सूजन, भूख कम लगना, कमजोरी, वजन घटना और लगातार थकान जैसी समस्याएं हो रही थीं. जांच में पता चला कि उसे ‘हेपैटोब्लास्टोमा’ नामक दुर्लभ और आक्रामक लीवर कैंसर है। इसके बाद उस पर कीमोथेरेपी सहित कई उपचार शुरू किए गए, लेकिन ट्यूमर की स्थिति ऐसी थी कि सामान्य सर्जरी संभव नहीं थी। डॉक्टरों ने लीवर ट्रांसप्लांट को ही अंतिम विकल्प बताया। अपने बेटे की जान बचाने के लिए ज्योति ने बिना किसी डर के अपने लीवर का करीब 250 ग्राम हिस्सा दान करने का फैसला किया। करीब 10 घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद प्रियांश को नया जीवन मिला। खुद ऑपरेशन से उबरने के बावजूद ज्योति आज भी अपने बेटे और परिवार की जिम्मेदारियां मजबूती से निभा रही हैं।

वाडिया अस्पताल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मिनी बोधनवाला के अनुसार भारत में एंड-स्टेज लीवर डिजीज से पीड़ित बच्चों के लिए ‘लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट’ जीवनदान साबित हो रहा है। हर ट्रांसप्लांट सिर्फ चिकित्सकीय सफलता नहीं, बल्कि उम्मीद, त्याग और इंसानियत की मिसाल है।

वाडिया अस्पताल में अब तक हुए 16 बाल लीवर ट्रांसप्लांट में से करीब 70 प्रतिशत मामलों में माताओं ने अपने लीवर का हिस्सा दान कर बच्चों को नया जीवन दिया है। मदर्स डे केवल मां के प्यार, त्याग और बच्चों के साथ उसके अटूट रिश्ते का उत्सव नहीं है, बल्कि कई बार यह मातृत्व अपने बच्चे को नया जीवन देने का साहस भी बन जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार