ठाणे मनो चिकित्सालय ने 4माह से बिछुड़े युवा को घर भेजा
मुंबई,26 मार्च ( हि,. स.) । ठाणे स्थित मनो चिकित्सालय की अब अनूठी पहचान बन गई है जहां अपने घर से किसी भी परस्थिति में अलग हुए बच्चे,युवा अथवा बुजुर्ग जन भटकते-भटकते भूले बिसरे लोग यहां पहुंचते या पहुंचाए जाते हैं ठाणे अस्पताल की पूरी टीम उसकी सेवा में जी जान लगाकर उसे न केवल सामान्य बनाने हेतू भरसक प्रयास करते है बल्कि उनकी यादाश्त ताजा कराकर उन्हें बिछड़े परिजनों से भी मिलवाते है ।इस तरह के एक दो नहीं अनेकों मामले प्रत्यक्ष सामने आए हैं,जब कई महीनों की मेहनत से उनकी यादाश्त की ताजा कर उन्हें यहां के स्टाफ ने अपनों से मिलाया है।ठाणे के प्रादेशिक मनो चिकित्सालय रीजनल हाल ही में मुंबई में लापता बिहार के एक युवक को चार महीने बाद उसके परिवार से मिलाने में कामयाबी हासिल की है। मेडिकल इलाज के साथ-साथ सोशल सेवा विभाग की लगन और पुलिस के तालमेल से यह दिल को छू लेने वाला मिलन मुमकिन हो पाया।
7 नवंबर, 2025 को युवक मुंबई के मरीन ड्राइव इलाके में मानसिक रूप से परेशान हालत में मिला था। पुलिस ने उसे इलाज के लिए ठाणे रीजनल साइकेट्रिक हॉस्पिटल में भर्ती कराया। शुरू में वह बिल्कुल शांत था। स्थिति को देखकर उस युवक का इलाज मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नेताजी मुलिक की देखरेख में किया गया।
ठाणे मनो चिकित्सालय के स्टाफ ने इस मरीज़ को ठीक करने के लिए लगातार बातचीत करने की कोशिश की। कुछ दिनों बाद, मरीज़ ने बताया कि उसका नाम सुरेंद्र शर्मा (बदला हुआ नाम) है और वह बिहार के छपरा ज़िले का रहने वाला है। इसके बाद, सोशल सर्विस सुपरिटेंडेंट सतीश वाघ ने तुरंत बिहार पुलिस से कॉन्टैक्ट किया और दाउदपुर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर कुंदन कुमार से कोऑर्डिनेट किया।
जांच के दौरान, एक ज़रूरी बात सामने आई कि मरीज़ का परिवार अभी बिहार में नहीं था, बल्कि दिल्ली में बस गया था। पुलिस ने मरीज़ की फ़ोटो सोशल मीडिया पर शेयर कीं। यह जानकारी देखकर, एक लोकल आदमी ने मरीज़ के भाई रितेश का संपर्क नंबर पुलिस को दिया गया ।
13 जनवरी, 2026 को वीडियो कॉल के ज़रिए मरीज़ की पहचान हुई। चूंकि उस समय मरीज़ पूरी तरह ठीक नहीं था, इसलिए चिकित्सकों ने इलाज पूरा होने के बाद ही उसे परिवार को सौंपने का फ़ैसला किया। इस दौरान, हॉस्पिटल के स्टाफ़ ने काउंसलिंग के ज़रिए मरीज़ को साइकोलॉजिकल सपोर्ट दिया।
हाल ही में, मरीज़ की हालत में सुधार होने के बाद, उसके भाई रितेश को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और दोनों फिर से इमोशनल माहौल में मिले। रितेश ने अपनी भावनाएँ ज़ाहिर करते हुए कहा, “मेरा भाई पहले दिल्ली से लापता हो गया था, लेकिन ठाणे के प्रादेशिक मनो चिकित्सालय ने उसे ढूँढ़कर हम पर बहुत बड़ा एहसान किया।”
डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. प्राची चिवटे, सीनियर साइकियाट्रिस्ट डॉ. आशीष पाठक, डॉ. मनोज भिसे, नितिन शिवड़े, मैट्रन माधुरी कांबले, नर्स स्मिता राणे, रूपाली भगत, सोशल सर्विसेज़ डिपार्टमेंट के अधिकारियों के साथ-साथ नर्सों और स्टाफ़ ने इस पूरे प्रोसेस में कीमती योगदान दिया।
इस बारे में ठाणे मनो चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ नेताजी मुलिक ने कहा कि “मेंटल हेल्थ ट्रीटमेंट में मेडिकल केयर के साथ-साथ रिहैबिलिटेशन भी उतना ही ज़रूरी है। यह हमारे लिए संतोषजनक और प्रेरणा देने वाला है कि यह मरीज़ अपने परिवार से फिर मिल सका।”
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

