सूखे में स्थालांतरित परिवारों के लिए 'माइग्रेशन ट्रैकिंग सिस्टम'
मुंबई, 20 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार के महिला व बाल कल्याण विभाग ने सूखे की वजह से स्थलांतरित होने वाले परिवारों के लिए एक खास प्लान बनाया है। इससे अपना गांव छोड़कर गन्ना काटने, ईंट भट्टों व दूसरी जगहों पर मजदूरी करने जाने वाले परिवारों के बच्चों और महिलाओं को सरकारी योजनाओं का फायदा मिलता रहेगा। 'माइग्रेशन ट्रैकिंग सिस्टम' का इस्तेमाल स्थलांतरित परिवारों का रिकॉर्ड रखने और उन्हें संबंधित इलाकों के आंगनवाडी सेंटरों से जोड़ने के लिए किया जाएगा।
इस पहल का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि माइग्रेशन की वजह से छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, दूध पिलाने वाली माताएं और नाबालिग लड़कियां न्यूट्रिशन और स्वास्थ्य सेवा से वंचित न रहें। गन्ना काटने के मौसम में स्थलांतरित मजदूरों की जानकारी लेने के लिए चीनी मिलों और सहकारी क्षेत्रों से समन्वय किया जाएगा। उन जगहों का रिकॉर्ड रखा जाएगा जहां मज़दूरों के परिवार रह रहे हैं। विस्थापित परिवारों के बच्चों को रेगुलर सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन मिलना चाहिए। कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य पर खास ध्यान दिया जाएगा। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए हेल्थ चेक-अप और वैक्सीनेशन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए साफ पीने के पानी और साफ-सफाई के भी उपाय किए जाएंगे।
राज्य में फिलहाल 1 लाख 8 हजार 627 आंगनबाड़ी सेविका और 1 लाख 5 हजार 470 सहायिका काम कर रही हैं। ये सेवाएं उनके जरिए लाभार्थियों तक पहुंचाई जाएंगी। महिला व बाल कल्याण मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि मुश्किल हालात में भी बच्चों का न्यूट्रिशन और माताओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहना चाहिए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

