मुंबई ऑटो-टैक्सी यूनियन ने की मराठी ट्रेनिंग की समय-सीमा तीन महीने बढ़ाने की मांग
मुंबई, 14 अगस्त, (हि.स.)। मुंबई ऑटो-रिक्शा-टैक्सीमैन यूनियन ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए अनिवार्य प्रैक्टिकल मराठी भाषा प्रशिक्षण की समय-सीमा तीन महीने बढ़ाने की मांग की है।
यूनियन अध्यक्ष शशांक राव ने आज पत्रकारों को बताया कि मौजूदा समय-सीमा और उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाएं राज्य में बड़ी संख्या में कमर्शियल ड्राइवरों को समय पर प्रशिक्षण देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। महाराष्ट्र सरकार ने ड्राइवरों के लिए प्रैक्टिकल मराठी भाषा प्रशिक्षण पूरा करने की अंतिम तारीख 15 अगस्त तय की है। समय-सीमा पूरी नहीं करने वाले ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। संगठन ने मांग की है कि तीन महीने की प्रस्तावित अतिरिक्त अवधि के दौरान कार्रवाई रोक दी जाए।
राव ने बताया कि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में 5.5 लाख से अधिक ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक हैं, जबकि पूरे महाराष्ट्र में इनकी संख्या 15 लाख से ज्यादा है। इनमें से करीब 60 से 70 प्रतिशत चालक मराठी नहीं बोलते और उन्हें कामकाज के स्तर की मराठी सीखने के लिए उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। एक चालक को व्यावहारिक रूप से मराठी सीखने में लगभग तीन से चार सप्ताह लग सकते हैं। ऐसे में मौजूदा समय-सीमा के भीतर सभी चालकों को प्रशिक्षण देना मुश्किल है।
उन्होंने परिवहन विभाग से मौजूदा मराठी प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या बढ़ाने और पूरे महाराष्ट्र में स्थायी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की मांग की है। इससे नए लाइसेंस प्राप्त करने वाले चालक भी लगातार भाषा प्रशिक्षण हासिल कर सकेंगे। केवल मराठी प्रशिक्षण प्रमाणपत्र लंबित होने के कारण चालकों को परिवहन विभाग की रोजमर्रा की सेवाओं से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और न ही इन सेवाओं में अनावश्यक देरी होनी चाहिए। पर्याप्त प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने से ड्राइवरों की दैनिक कमाई प्रभावित हो सकती है और इस क्षेत्र पर निर्भर हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। साथ ही, बड़ी संख्या में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों पर कार्रवाई होने से मुंबई और पूरे महानगरों में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता भी प्रभावित होने की आशंका है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

