यूपीआई और एमडीआर को लेकर व्यापारी चिंतित -रवींद्र मानगावे
मुंबई, 23 सितंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर के अध्यक्ष रवींद्र मानगावे ने कहा कि डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने की केंद्र सरकार की नीति के बीच यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चंट डिसकाउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने के प्रस्ताव को लेकर व्यापारी संगठनों में चिंता बढ़ गई है। महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज ने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करे। अन्यथा महाराष्ट्र सहित देशभर के व्यापारी संगठनों को साथ लेकर लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक रुख अपनाना पड़ेगा।
मुंबई स्थित महाराष्ट्र चेंबर के मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में मानगावे ने आज कहा, हमारा यूपीआई पेमेंट का विरोध नहीं है; लेकिन यूपीआई लेन-देन पर नए सिरे से लगाए जाने वाले 0.4 प्रतिशत एमडीआर का हमारा कड़ा विरोध है। व्यापारियों के मुनाफे पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला कोई भी निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मानगावे ने बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यापारिक यूपीआी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अधिकांश यूपीआई लेन-देन इससे प्रभावित नहीं होंगे और छोटे व्यापारियों के लिए मौजूदा छूट भी जारी रहेगी। हालांकि, महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में छोटे व्यापारी और विक्रेता हैं, इसलिए इस व्यवस्था के उनके कारोबार पर पडऩे वाले प्रभाव पर विचार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा के बीच छोटे व्यापारी पहले से ही कम मुनाफे पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में यूपीआई लेन-देन पर अतिरिक्त लागत से उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। पेट्रोल पंप व्यवसायियों ने भी प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। सरकार के अनुसार यूपीआई का खर्च ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा। हालांकि, महाराष्ट्र चेंबर का कहना है कि व्यापारियों की लागत बढऩे पर इसका अप्रत्यक्ष असर बाजार पर पड़ सकता है। व्यापारियों द्वारा कीमतों में बदलाव करने या कुछ परिस्थितियों में यूपीआई भुगतान स्वीकार करने को लेकर पुनर्विचार किए जाने की संभावना से भी मानगावे ने चिंता जताई। मानगावे ने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को व्यापारी वर्ग की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि यूपीआई लागू करने के निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

