महाराष्ट्र में ‘स्किल पासपोर्ट’, अपडेटेड ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान : मुख्यमंत्री
मुंबई, 21 सितंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि सूबे में ‘स्किल पासपोर्ट’, अपडेटेड ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर रोजगार की बदलती जरूरतों को देखते हुए महाराष्ट्र के युवाओं को कौशल और भाषा प्रशिक्षण देकर अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि विभिन्न देशों में कुशल जनशक्ति की मांग का आकलन कर देशवार ‘स्किल पासपोर्ट’ तैयार करने तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और अन्य प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रमों को समयानुकूल बनाने की जरूरत है। साथ ही विदेश में रोजगार के लिए युवाओं को सुरक्षित भर्ती प्रक्रिया उपलब्ध कराने पर भी राज्य सरकार का जोर रहेगा।
मुख्यमंत्री आज सह्याद्री गेस्ट हाउस में अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता पर आयोजित एक दिवसीय उच्चस्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का आयोजन महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन, प्रोटोकॉल विभाग, कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग तथा महाराष्ट्र एजेंसी फॉर होलिस्टिक इंटरनेशनल मोबिलिटी एंड एडवांसमेंट की ओर से संयुक्त रूप से किया गया था। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आबादी में हो रहे बदलाव और बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण कुशल जनशक्ति की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत की युवा कार्यबल क्षमता को देखते हुए देश की कुशल जनशक्ति और वैश्विक रोजगार मांग के बीच प्रभावी तालमेल स्थापित करना जरूरी है। इससे ‘सर्कुलर मोबिलिटी ऑफ टैलेंट’ की अवधारणा को भी मजबूती मिलेगी और महाराष्ट्र इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।
उन्होंने कहा कि भारत ने करीब 28 देशों के साथ श्रम गतिशीलता को लेकर समझौते किए हैं। इन देशों में इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, निर्माण और विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में कुशल जनशक्ति की मांग है। विश्व आर्थिक मंच की ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, वर्ष 2030 तक दुनिया भर में करीब 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान है, जबकि करीब 9.2 करोड़ नौकरियां समाप्त हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र अंतरराष्ट्रीय कार्यबल गतिशीलता के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में काम करेगा। भर्ती एजेंसियों के अनुभव और विभिन्न देशों की जनशक्ति संबंधी जरूरतों की जानकारी प्रशिक्षण संस्थानों तक पहुंचाई जानी चाहिए, ताकि युवाओं को रोजगार की वास्तविक मांग के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा सके। राज्य सरकार की प्रस्तावित ग्लोबल वर्कफोर्स मोबिलिटी पॉलिसी में कौशल विकास, वैश्विक मांग के अनुरूप प्रशिक्षण, भाषा प्रशिक्षण, प्रमाणन, दस्तावेजी सहायता और विदेश जाने से पहले मार्गदर्शन को प्राथमिकता दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेश से लौटने वाले कुशल कामगारों को राज्य की औद्योगिक इकाइयों से जोडऩे पर भी सरकार ध्यान देगी, ताकि उनके अनुभव और कौशल का राज्य में भी उपयोग किया जा सके।
इस अवसर पर जर्मन काउंसलर क्रिस्टोफ हेलियर, जापानी प्रतिनिधि सातो हितोमी, फ्रांसीसी प्रतिनिधि पैट्रिक लिवरिनो, रूसी प्रतिनिधि यवोन पेटिसोव, अंग्रेजी प्रतिनिधि जॉन निकेल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण परदेशी, केंद्रीय कौशल विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव निरंजन कुमार सुधांशु, राष्ट्रीय कौशल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण कुमार पिल्लई, आयुक्त डॉ. अमित सैनी, प्रोटोकॉल विभाग के सचिव राजेश गवांडे सहित अंतरराष्ट्रीय रोजगार संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

