परिवार बचाओ मोर्चा है विपक्ष का मार्च, लोकतंत्र बचाओ नहीं : संजय निरुपम
मुंबई, 06 अक्टूबर (हि.स.)। संसद भवन से निर्वाचन सदन तक विपक्षी सांसदों के मार्च को लेकर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने मंगलवार को कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने भले ही इस मार्च को ‘लोकतंत्र बचाओ मोर्चा’ नाम दिया हो, लेकिन वास्तव में यह लोकतंत्र बचाने के बजाय अपने परिवार और राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की कोशिश है।
संजय निरुपम ने पत्रकारों को बताया कि मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, यूबीटी और शरद पवार की एनसीपी समेत कई दल शामिल हैं। इन दलों पर लंबे समय से परिवारवाद की राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले विपक्षी दलों को अपने भीतर के लोकतंत्र और राजनीतिक व्यवस्था पर भी आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के पारंपरिक राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती मिली है। चुनावी राजनीति में लगातार संघर्ष कर रहे ये दल अब निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक आंदोलन का रूप दे रहे हैं।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर विपक्ष के सवालों को लेकर निरुपम ने कांग्रेस के पुराने शासनकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी स्वतंत्रता को लेकर सवाल कोई नया विषय नहीं है। समय-समय पर विभिन्न समितियों और आयोगों ने चुनाव सुधारों को लेकर सुझाव दिए हैं। निरुपम ने कहा कि 2006 में तत्कालीन चुनाव आयुक्त नवीन चावला की नियुक्ति और उनकी कथित राजनीतिक निकटता को लेकर भी विवाद हुआ था। उन्होंने कहा कि आज राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में कॉलेजियम जैसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने पुराने शासनकाल और उस समय के रुख को भी याद करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को राजनीतिक आरोपों के बजाय चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, नियुक्ति प्रक्रिया और राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र पर तथ्यात्मक बहस करनी चाहिए। निरुपम ने आरोप लगाया कि विपक्ष का यह मार्च लोकतंत्र बचाने के नाम पर राजनीतिक प्रदर्शन है। उन्होंने कहा, इसे लोकतंत्र बचाओ मोर्चा नहीं, परिवार बचाओ मोर्चा कहना ज्यादा उचित होगा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

