पुणे में युवा शक्ति ने ‘वंदे मातरम’ गाकर देशभक्ति की लौ जलाई
मुंबई, 22 अगस्त (हि.स.)। पुणे में शनिवार शाम को देशभक्ति के गीतों की धुन, हजारों मोबाइल फ्लैशलाइट की चमक और युवाओं के एक साथ गूंजते ‘वंदे मातरम’ के नारों से सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय का परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया। ‘वंदे मातरम कृति समिति, पुणे’ की ओर से आयोजित विशेष म्यूजिकल कार्यक्रम ‘यूथ की आवाज’ को युवाओं का उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से आज पुणे में भारतीय संविधान के रचयिता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा के पास आयोजित इस कार्यक्रम में ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम के सम्मान में, देश के युवा मैदान में’ जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। कार्यक्रम में देशभक्ति के साथ महाराष्ट्र की अस्मिता को दर्शाने वाले गीत भी प्रस्तुत किए गए। इनमें ‘जिंदगी मौत न बन जाए’, ‘सुनो गौर से दुनियावालों’, ‘कोई कहे कहे रहे’, ‘जय हो’, ‘जय जय जय महाराष्ट्र माझा’, ‘शूर आम्ही सरदार’ और ‘वेडात मराठे वीर दौडले सात’ जैसे गीत शामिल रहे।
इस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष के इतिहास को भी याद किया गया। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ से निकले इस गीत के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान पर प्रकाश डाला गया। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में ‘वंदे मातरम’ का गायन किया था। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत बना। कार्यक्रम के समापन पर मैदान की रोशनी कम कर दी गई। जैसे ही हजारों मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट एक साथ जलीं, पूरा परिसर तारों से सजे आकाश जैसा नजर आने लगा। हाथों में मोबाइल की रोशनी और होठों पर ‘वंदे मातरम’ लिए युवाओं ने सामूहिक रूप से गीत गाया। कार्यक्रम का समापन विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के संकल्प के साथ हुआ।
इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं सहकारिता राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने पुणे के युवाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा, मैं पुणे के युवाओं को दिल से बधाई देता हूं। आज देशभक्त युवा पूरा वंदे मातरम गाएंगे। हम संविधान से मिले अधिकार का इस्तेमाल वंदे मातरम गाने के लिए कर रहे हैं। मोहोल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस में कुछ लोगों ने पूरा ‘वंदे मातरम’ गाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को देश, क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की ताकत और शक्ति बनकर आगे आएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

