पुणे फेस्टिवल आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा : चंद्रकांत पाटिल
मुंबई, 16 अगस्त, (हि.स.)। महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और पुणे फेस्टिवल सलाहकार समिति के अध्यक्ष चंद्रकांत दादा पाटिल ने रविवार को कहा कि शहर की पहचान को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने वाला सांस्कृतिक आयोजन पुणे फेस्टिवल आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।
पुणे के कलाकारों के साथ आयोजित बैठक में पाटिल ने आज कहा कि सलाहकार समिति के अध्यक्ष के रूप में मिली नई जिम्मेदारी के साथ न्याय करने के लिए वह पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि पुणे फेस्टिवल की अपनी विशिष्ट पहचान है और इससे जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों को पूरे वर्ष आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अभिनेत्री एवं नृत्यांगना हेमा मालिनी वर्षों से पुणे फेस्टिवल में अपनी प्रस्तुतियां देती रही हैं। किसी कलाकार का किसी सांस्कृतिक महोत्सव से इस तरह लंबे समय तक जुड़ाव बहुत कम देखने को मिलता है।
उन्होंने पुणे की कम चर्चित विरासत और सांस्कृतिक स्थलों की पहचान कर उन्हें लोगों के सामने लाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कोल्हापुर की पहल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 84 कम चर्चित स्थलों की पहचान की गई है और इन स्थानों को लोगों तक पहुंचाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। पुणे में भी इसी तरह की पहल शुरू की जानी चाहिए, ताकि लोग शहर की अनदेखी विरासत और सांस्कृतिक स्थलों को जान सकें। यह बैठक पुणे फेस्टिवल के संस्थापक-अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुरेश कलमाड़ी के निधन के बाद आयोजित होने वाले 38वें संस्करण की तैयारियों की पृष्ठभूमि में हुई।
इस अवसर पर प्रसिद्ध नृत्यांगना सुचेता भिड़े चापेकर और सत्यशील देशपांडे को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। बैठक में पुणे के 50 से अधिक प्रमुख कलाकारों, शिक्षाविदों, लेखकों, कवियों और कार्यक्रम समन्वयकों ने हिस्सा लिया। पुणे फेस्टिवल के अध्यक्ष कृष्णकुमार गोयल ने कहा कि सुरेश कलमाड़ी के निधन के बाद आयोजित होने वाले 38वें पुणे फेस्टिवल की अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रतिष्ठा को बनाए रखना फेस्टिवल से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नए कलाकारों को नए विचारों के साथ आगे आते और फेस्टिवल में भाग लेते देखना उत्साहजनक है।
बैठक में पुणे फेस्टिवल के अध्यक्ष कृष्णकुमार गोयल, उपाध्यक्ष सुभाष सांस, सचिव एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मुख्य समन्वयक डॉ. सतीश देसाई तथा बाल गंधर्व कार्यक्रम प्रमुख एवं ट्रस्टी मोहन टिल्लू उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

