नासिक सिंहस्थ कुंभ में संतों-महंतों ने राज्य सरकार से ‘धर्मादेश’ लागू करने का आग्रह किया
मुंबई, 01 अक्टूबर (हि.स.)। नासिक सिंहस्थ कुंभ पर्व में गैर-हिंदुओं के प्रवेश और अन्य धर्मों के लोगों को दुकानें लगाने से रोकने की मांग को लेकर संतों-महंतों ने महाराष्ट्र सरकार से ‘धर्मादेश’ लागू करने का आग्रह किया है।
मुंबई स्थित स्वातंत्र्यवीर सावरकर नेशनल मेमोरियल में गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सितंबर में नासिक में आयोजित ‘ज्ञान कुंभ 2026’ में पारित धर्मादेश की प्रति राज्य सरकार को सौंपे जाने की जानकारी दी गई।
महंत अनिकेत शास्त्री ने बताया कि धर्मादेश की प्रति उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सौंपी गई है, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी इसकी प्रति दी जाएगी। धर्मादेश में सिंहस्थ कुंभ की धार्मिक परंपराओं और इतिहास का उल्लेख करते हुए आयोजन के दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुरूप व्यवस्था की मांग की गई है। धर्मादेश में कहा गया है कि यदि गैर-हिंदू सिंहस्थ कुंभ में आते हैं तो उन्हें हिंदू धर्म में आस्था रखनी चाहिए। साथ ही अन्य धर्मों से जुड़े लोगों को कुंभ क्षेत्र में दुकानें लगाने से रोकने की मांग की गई है।
स्वातंत्र्यवीर सावरकर नेशनल मेमोरियल के कार्यकारी अध्यक्ष रंजीत सावरकर ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि हिंदुओं की आस्था से जुड़ा धार्मिक आयोजन है। उन्होंने कहा कि कुंभ पर्व संतों और धर्मगुरुओं की परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए।
हिंदू जनजागृति समिति के प्रवक्ता डॉ. उदय धुरी ने भी कुंभ क्षेत्र में अन्य धर्मों के लोगों को दुकानें लगाने की अनुमति नहीं देने की मांग की। महंत भक्ति चरणदास ने प्रयागराज महाकुंभ का हवाला देते हुए नासिक सिंहस्थ में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग की। आयोजकों के अनुसार, ‘ज्ञान कुंभ 2026’ में विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के संतों और महंतों ने भाग लिया था। इसमें वेद, पुराण, उपनिषद, ब्रह्मसूत्र, इतिहास और ज्योतिष आदि के आधार पर करीब 500 पृष्ठों का धार्मिक अध्ययन किया गया, जिसे धर्मादेश का आधार बताया गया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

