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नाना पाटेकर के निधन पर फडणवीस समेत नेताओं ने जताया शोक, कहा- अभिनय का एक युग चला गया

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मुंबई, 08 अक्टूबर (हि.स.)। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। फडणवीस ने नाना पाटेकर को अपना करीबी मित्र बताते हुए उनके अचानक निधन को अपने लिए बड़ा व्यक्तिगत आघात बताया।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि वरिष्ठ अभिनेता और उनके करीबी मित्र नाना पाटेकर का असमय और अचानक जाना उनके लिए बेहद दुखद है। नाना जितने बड़े कलाकार थे, उतने ही बड़े दिल वाले इंसान भी थे। उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा को एक अलग दौर दिया। ‘क्रांतिवीर’ से ‘नटसम्राट’ तक उनके अभिनय की कोई बराबरी नहीं है। उनकी मजबूती और निडरता उनकी पहचान थी, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर उन्होंने हमेशा उनमें एक संवेदनशील और जेंटलमैन इंसान देखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलयुक्त शिवार अभियान के दौरान नाना पाटेकर ने खुद आगे बढक़र अभियान का समर्थन किया था। अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की और किसानों तथा सूखा प्रभावित लोगों की मदद के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि नाना हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे रहे। उनका जाना कला और समाज, दोनों के लिए बड़ी क्षति है।

उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर अभिनय के सच्चे इनोवेटर और सामाजिक सरोकारों से जुड़े संवेदनशील कलाकार थे। ‘नटसम्राट’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने दमदार अभिनय से किरदारों को अमर किया। कला के साथ किसानों और समाज के वंचित वर्गों के लिए उनका योगदान हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा कि नाना पाटेकर का निधन बेहद दुखद है। उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदारों को अपनी आवाज और प्रभावशाली भाव-भंगिमा से खास पहचान दी। ‘अंकुश’ और ‘पुरुष’ से शुरू हुआ उनका सफर ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों तक पहुंचा। ‘नटसम्राट’ में उनके अभिनय की गहराई ने एक बार फिर दर्शकों को प्रभावित किया।

चव्हाण ने कहा कि नाना पाटेकर को उनके अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ के माध्यम से किसानों और जरूरतमंद परिवारों के लिए उल्लेखनीय काम किया। नाना पाटेकर के निधन से अभिनय की दुनिया ने एक संवेदनशील सोच, दमदार आवाज और सच्चा कलाकार खो दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव