महाराष्ट्र की इकोनॉमी 7.9 फीसदी बढ़ने की उम्मीद: आर्थिक सर्वे
मुंबई, 05 मार्च (हि.स.)। 'महाराष्ट्र इकोनॉमिक सर्वे 2025-26' की रिपोर्ट में राज्य की इकॉनमी मौजूदा वित्तीय वर्ष में 7.9 फीसदी बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। राज्य में कृषि, उद्योग और सर्विस सेक्टर में बैलेंस्ड ग्रोथ, इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े इन्वेस्टमेंट और ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजऩेस को बेहतर बनाने के लिए किए गए सुधारों की वजह से राज्य की इकॉनमिक कॉम्पिटिटिवनेस मज़बूत हुई है।
वित्त राज्यमंत्री आशीष जायसवाल ने गुरुवार को विधानसभा में महाराष्ट्र इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 रिपोर्ट पेश किया। इसके अनुसार 2025-26 में राज्य की नॉमिनल ग्रॉस स्टेट इनकम 51,00,597 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है, जबकि असल ग्रॉस स्टेट इनकम 28,82,699 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। राज्य की पर कैपिटा इनकम भी 3,47,903 रुपये होने की उम्मीद है, जो पूरे भारत की पर कैपिटा इनकम (2,19,575 रुपये) से काफी ज़्यादा है।
आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पहले रिवाइज़्ड अनुमान के मुताबिक, 2024-25 में देश के नॉमिनल ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट में महाराष्ट्र का हिस्सा 14 प्रतिशत होगा, जो देश में सबसे ज़्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में रोड, मेट्रो, पोर्ट, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किए गए इन्वेस्टमेंट की वजह से इंफ्रास्ट्रक्चर का डवलपमेंट तेज़ी से हो रहा है।
आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार साल 2025-26 में अलग-अलग सेक्टर में ग्रोथ की उम्मीद है। इसमें खेती और उससे जुड़ी एक्टिविटीज़ में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि इंडस्ट्रियल सेक्टर में 5.7 परसेंट और सर्विस सेक्टर में 9.0 परसेंट की बढ़ोतरी की उम्मीद है। सर्विस सेक्टर में तेज़ ग्रोथ राज्य की इकॉनमी को बड़ा सपोर्ट दे रही है। 2025-26 में राज्य का रेवेन्यू कलेक्शन 5,60,964 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इसमें से 4,77,400 करोड़ रुपये टैक्स रेवेन्यू और 33,052 करोड़ रुपये नॉन-टैक्स रेवेन्यू होने की उम्मीद है।
राज्य ने पिछले एक दशक में फिस्कल डेफिसिट को ग्रॉस स्टेट इनकम के 3 प्रतिशत की लिमिट के अंदर रखने की अपनी कोशिशें जारी रखी हैं। 2025-26 में इसके 2.7 परसेंट होने का अनुमान है।
‘महाराष्ट्र इंडस्ट्री, इन्वेस्टमेंट और सर्विस पॉलिसी 2025 के तहत, राज्य में बड़े पैमाने पर इन्वेस्टमेंट लाने पर ज़ोर दिया गया है। दिसंबर 2025 तक, 63.85 लाख माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज़ रजिस्टर हो चुके हैं, जिनसे 2.52 करोड़ से ज़्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

