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कॉरपोरेट, शैक्षणिक संस्थान और सरकारी विभाग दिव्यांगजनों के लिए रोजगार एवं कौशल विकास के अधिक अवसर उपलब्ध कराएंः राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

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मुंबई, 03 जुलाई (हि.स.)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने शुक्रवार को मुंबई में कहा कि कॉरपोरेट, शैक्षणिक संस्थान और सरकारी विभाग दिव्यांगजनों के लिए रोजगार एवं कौशल विकास के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि 'विकसित भारत' का अर्थ एक समावेशी भारत है, जिसमें दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण एक महत्वपूर्ण आधार है।

दिव्यांगजनों के कौशल विकास एवं सशक्तिकरण के लिए कार्यरत 'सार्थक एजुकेशन ट्रस्ट' के 18वें स्थापना दिवस समारोह में आज मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल यह विचार व्यक्त कर रहे थे। यह समारोह को वल्र्ड ट्रेड सेंटर, मुंबई में आयोजित किया गया था। राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही प्रगति दिव्यांगजनों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही है। किंतु प्रौद्योगिकी का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब उसमें करुणा, मानवीय संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण का समावेश हो।

राज्यपाल ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वर्ष 2016 में पारित दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम ने विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं से ग्रसित नागरिकों को उनके अधिकारों की प्रभावी कानूनी सुरक्षा प्रदान की है। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 2.68 करोड़ तथा महाराष्ट्र में लगभग 30 लाख दिव्यांगजन हैं। राज्य सरकार द्वारा स्वरोजगार, पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा तथा 'सुगम' पोर्टल के माध्यम से दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए अनेक उपयोगी पहल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों का समावेशी विकास केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव लव वर्मा ने कहा कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि में दिव्यांगजनों के लिए पृथक उप-कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए तथा कुल सीएसआर व्यय का कम-से-कम दो प्रतिशत दिव्यांगजन कल्याण के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान किया जाना चाहि

प्रसिद्ध दूरदर्शन कार्यक्रम 'सुरभि' के प्रस्तोता एवं 'सार्थक' के सलाहकार सिद्धार्थ काक ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए विश्वस्तरीय कौशल प्रतियोगिताओं का आयोजन होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि दिव्यांगजनों की कौशल प्रतिभा को प्रदर्शित करने वाली एबिलिम्पिक्स प्रतियोगिता के लिए प्रत्येक जिले से प्रतिभागियों का चयन किया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजनों से समाज में दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

समारोह में प्रसिद्ध मीडिया व्यक्तित्व सिद्धार्थ काक, पूर्व केंद्रीय सचिव लव वर्मा, 'सार्थक' के संस्थापक डॉ. जितेंद्र अग्रवाल, वल्र्ड ट्रेड सेंटर, मुंबई की निदेशक प्रिया पानसरे, संगीता जैन, बड़ी संख्या में दिव्यांग युवक-युवतियां तथा नेशनल एबिलिम्पिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव